कोई सात साल पहले बड़े परदे पर फिल्म 'आश्चर्यचकित' में नजर आए वैभव राज गुप्ता की वेब सीरीज ‘गुल्लक’ हिट होने के बाद फिर से बड़े परदे पर मांग बढ़ रही है वेब सीरीज 'स्ट्रगलर्स' से ही उनकी एक्टिंग की बोहनी हुई थी और उत्तर प्रदेश में हरदोई जिले के बेनीगंज में कभी गायों की सेवा करते रहे वैभव का वैभव इन दिनों हर तरफ नजर आ रहा है। बेनीगंज में सातवीं तक की पढ़ाई करने वाले वैभव का पूरा परिवार इसके बाद सीतापुर आकर बसा। सीतापुर में ही वह मिस्टर सीतापुर बने और अब उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बनी है वेब सीरीज ‘गुल्लक’। वैभव से एक खास बातचीत...
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बहुत। मतलब ये मेरे करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा है। मैं लकी रहा हूं इस मामले में। लेकिन, उसके पीछे बहुत हार्ड वर्क रहा है। बहुत सालों की मेहनत रही है। ‘गुल्लक’ से पहले जो भी मैं कर रहा था। बहुत सोच कर रहा था। डर भी था कि ये नहीं चला तो? लेकिन, जिद ये भी थी कि हम वही करेंगे जिसमें किरदार थोड़ा मुश्किल हो। जिसमें लगे कि हां भीतर से खुशी मिल रही है और थोड़ा चुनौती भरा लग रहा है किरदार।
हां, ‘गुल्लक वन’ जब आया तो पहले मैं नही कर रहा था। लेकिन, इसके बाद धीरे धीरे ऑडिशन तक बात पहुंची। फिर मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी। फिर मुझे ये बहुत अच्छा लगने लगा। मुझे लगा कि जहां से मैं आया हूं, अब मेरे पास एक मौका है, उसे दुनिया को दिखाने का। एक अभिनेता के तौर पर मेरा ये सपना था कि कभी मुझे कोई ऐसा किरदार मिलेगा जिसमें मैं जहां से मैं आया हूं, सीतापुर का अपना सारा अनुभव डालूंगा।
हां, इसमें जब मौका मिला मुझे अपने शहर की गलियों को परदे पर जीने को और जैसे ही मैंने ‘गुल्लक वन’ की स्क्रिप्ट फिर से पढ़ी और उसमें जिस तरह से अन्नू के किरदार का चरित्र चित्रण एक अर्धवृत्त बनाता जाता है, मुझे लगा कि अगर ये मैंने कर लिया तो मैं फिर अन्नू मिश्रा को जीने से मुझे कोई रोक नहीं सकता। तब मुझे नहीं पता था कि इसका दूसरा सीजन बनेगा भी। मुझे तो ये था कि अगर ये बन गया तो मुझे पीछे देखने का मौका नहीं मिलेगा, लोगों तक पहुंचेगा ये।
जब मैंने ‘गुल्लक’ का फर्स्ट सीजन किया था तो काफी कुछ पीछे जाना पड़ा था मुझे। अपने गांव, अपने लोगों के पास, जो छोटे छोटे संदर्भ एक कस्बाई जीवन शैली के उसमें डाले गए वे सारे मेरे जीवन में असल रूप में हो चुके हैं। अब भी मैं जब सीतापुर जाता हूं तो उनको बताता हूं कि मैंने आपका नाम, आपकी शैली, आपकी अदा यहां इस्तेमाल की है। मैंने ऐसे तो बहुत सारे अन्नू देखे हैं जीवन में लेकिन मेरे मामा का लड़का सोनू गुप्ता, वह इस किरदार के सबसे करीब है। उसकी शख्सीयत से मैंने बहुत कुछ चुराया है अन्नू मिश्रा को करने के लिए।