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Gullak S4 Review: बच्चों के बीच बड़े होते माता-पिता की दिल छू लेने वाली कहानी, लौट आई ‘गुल्लक’ की असली खनक

Fri, 07 Jun 2024 10:27 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 07 Jun 2024 10:27 AM IST
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Web Series Gullak Season 4 Review by Pankaj Shukla TVF Shreyansh Pandey Jameel Khan Vaibhav Harsh Geetanjali
गुल्लक (सीजन 4) - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
गुल्लक (सीजन 4)
कलाकार
जमील खान , गीतांजलि कुलकर्णी , वैभव राज गुप्ता , हर्ष मायर , सुनीता राजवर , शिवांकित सिंह परिहार और हेली शाह
लेखक
श्रेयांश पांडे और विदित त्रिपाठी
निर्देशक
श्रेयांश पांडे
निर्माता
अरुणाभ कुमार
ओटीटी
सोनी लिव
रिलीज
7 जून 2024
रेटिंग
4/5

स्कूटी पर लिखे नंबर से आरटीओ ऑफिस और उसके जिले का पता न भी लगाएं तो भी टीवीएफ की सीरीज ‘गुल्लक’ की कहानी उत्तर भारत के किसी भी छोटे से शहर की हो सकती है। टेढ़े-मेढ़े रास्ते हों, ऊबड़ खाबड़ गलियां हो, स्पाइडरमैन के बनाए जालों जैसे बिजली के खंभे हों, छतों पर घरों की मालियत बताता अचार और मुरब्बा हो, और हो, बिना दरवाजों के जीने से जुड़ा पड़ोस, ‘गुल्लक’ की असल रेजगारी यही है। इसी रेजगारी को गिनते गिनते मिश्रा परिवार चौथे सीजन तक आ पहुंचा है। फिल्म ‘श्रीकांत’ में ए पी जे अब्दुल कलाम के किरदार में हाल वाहवाही बटोरकर जमील खान फिर से ईमानदार बिजली कर्मचारी के किरदार में हैं। इस बार उनका चिकन और दारू छूटने की बारी है, क्योंकि बच्चे बड़े हो रहे हैं।

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गुल्लक (सीजन 4) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सुनती हो, बच्चे बड़े हो रहे हैं..

जी हां, बच्चे बड़े हो रहे हैं। ये जुमला हर मध्यमवर्गीय परिवार में सुनने को खूब मिलता है। लेकिन, कितने परिवार होंगे ऐसे जिन्हें ये जुमला समझ भी आता होगा। और, कितने परिवारों के मुखिया खुद को इस जुमले की समझ के हिसाब से समझाकर थोड़ा और समझदार होने की कोशिश ही करते होंगे। किताबों में छुपे प्रेम पत्र हर किशोरवय बच्चे के बस्ते में मोबाइल के दौर में भी मिल ही जाते हैं। प्रेम प्रकटन की ये सबसे निष्कपट और सीधी सी पहली चाल होती है। जमाना उसे शतरंज की गोटी समझ लेता है और फिर कभी ढाई घर, कभी टेढ़ी चाल तो कभी हाथी सा रास्ता बनाते चलने वाले लोग घरों में मनमुटाव कराते ही रहते हैं। लेकिन, इस सब उधेड़बुन के फंदे जब उलझते हैं और दिल बैठता सा महसूस होता है तो कोई पड़ोसी ही आकर आपकी रसोई में आपके लिए चाय बनाता है। यही वह एहसास है जो इस बात को साबित करता है कि भगवान आपके अच्छे पड़ोस में बसता है।

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गुल्लक (सीजन 4) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हाय राम, टीवीएफ का है जमाना

इन दिनों टीवीएफ का सीजन चल रहा है। प्राइम वीडियो पर ‘पंचायत’ का तीसरा सीजन पंचायत छोड़ बाकी सारी पंचायत कर रहा है। सचिव जी प्रशासनिक काम छोड़ राजनीति में उलझ चुके हैं। इसके चलते वहां मामला जमा नहीं है। ‘कोटा फैक्ट्री’ का नया गेट भी इसी महीने खुलने वाला है और इन दोनों के बीच फंसी है अपनी ‘गुल्लक’। फंसी इसलिए क्योंकि सबसे ज्यादा उम्मीद घरों में इसी धारावाहिक की होती है। पहला सीजन जो इस सीरीज का महका था, उसकी बासमती चावल के पुलाव सी महक लोग अब भी भूले नहीं है और जो उस महक को बीते दो सीजन में तलाशते रहे हैं, उनके लिए खुशखबरी ये है कि श्रेयांश पांडे और विदित त्रिपाठी की टीम ने इसे फिर से तलाश लिया है।

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गुल्लक (सीजन 4) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चूल्हे से चौके तक चाकचौबंद कहानी

स्कूटर पर घूमते अधिशासी अधिकारी (एक्सईएन) और पहले एपिसोड के नाम में कारण बताओ की बजाय कारण बताऊ जैसी गलतियां नजरअंदाज कर दें तो वेब सीरीज गुल्लक का चौथा सीजन बिल्कुल सही निशाने पर बैठा है। कहानी इस बार भी धीमी आंच पर पकती है। चूल्हे पर चढ़ी बटुइआ का अदहन टपक टपक कर आंच पर गिरता रहता है। थोड़ा धुआं भी आंखों में लगता है लेकिन सीजन का आखिरी एपिसोड बिल्कुल घई से निकली फूली हुई रोटी जैसा है। इस बार कामकाजी अन्नू मिश्रा पर रीझती डॉक्टर है, दोस्त को उसकी गर्लफ्रेंड से मिलवाने ले गए अमन को मिली नई दोस्त है, ईमानदारी की कमाई से दी जाती रिश्वत पर किलस कर रह जाने वाले मिश्रा जी हैं, खुली विचारधारा का नाड़े में बांधकर रखने की सलाह देती मिसराइन हैं और हैं मुरब्बा लेकर आई बिट्टू की मम्मी।

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गुल्लक (सीजन 4) - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
यही है राइट च्वाइस, बेबी! अहा..!!

विदित त्रिपाठी की लिखी सीरीज पर श्रेयांश पांडे ने टीवीएफ के डीएनए का असली मुलम्मा चढ़ाया है। यही टीवीएफ की असली ब्रांडिंग भी रही है। वैभव राज गुप्ता सीरीज के हीरो हैं। इस बार उनको हीरोइन भी मिलती दिख रही है। कहानी का एक विलेन भी है जो डॉक्टर प्रीति को आनंद का नाम कूलर वाले मिश्रा के नाम से ‘सेव’ करने को कहता है। लेकिन अन्नू भैया की ‘विधाता’ जैसी बन रही इस पिक्चर के दिलीप कुमार हैं जमील खान। उनकी अदाकारी पर सबका दिल फिदा रहता है। गीतांजलि कुलकर्णी जैसी मां हर कोई चाहता है। ऊपर से कड़क और अंदर से आइस्क्रीम की ठंडक सा आशीर्वाद देती मां। नन्हकऊ अमन के किरदार में हर्ष मायर की मटरगश्ती इस बार अलग रंग में है। भाइयों का प्यार और आपसी समझदारी का इमला पढ़ना हो तो ये सीरीज तुरंत बिंज वॉच कर डालिए, क्योंकि ‘अब पापा सॉरी बोलेंगे तो अच्छा थोड़े ही लगेगा!’

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