करीब सात दशक तक अपने करियर में नृत्य, थिएटर और फिल्मों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली इस अभिनेत्री ने 2014 में 102 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। पृथ्वीराज कपूर से लेकर उनके परिवार की चौथी पीढ़ी रणबीर कपूर तक के साथ अदाकारी के जलवे बिखेरने वालीं अभिनेत्री जोहरा सहगल की आज पुण्यतिथि है। उनका जन्म सहारनपुर में ढोली खाल के पास मोहल्ला दाऊद सराय में 27 अप्रैल 1912 को पठान मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम साहेबजादी जोहरा बेगम मुमताज उल्ला खान था। उनके पिता मुमताज उल्ला खान और नातिका उल्ला खान उतर प्रदेश के रामपुर निवासी थे।
सात बच्चों में तीसरे नंबर की जोहरा बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा वाली थीं, लेकिन अपनी रुचि के अनुसार नृत्य और रंगमंच में 14 साल तक सक्रिय रहने के बाद उनकी जवानी से लेकर बुढ़ापे तक का सफर फिल्मी दुनिया के नाम रहा। वह अकेली ऐसी शख्स रहीं, जिन्होंने पृथ्वीराज कपूर, पिछली सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर नए जमाने के अभिनेता रणबीर कपूर तक के साथ अभिनय कर छाप छोड़ी।
2 of 5
जोहरा सहगल
- फोटो : सोशल मीडिया
जोहरा सहगल ने 'चीनी कम', 'हम दिल दे चुके सनम', 'दिल से', 'वीर जारा' जैसी हिंदी फिल्मों में 'चुलबुली और ज़िंदादिल दादी' बनकर दर्शकों के दिलों में जगह बनाई थी। वहीं जोहरा की आखिरी हिंदी फिल्म 2007 में संजय लीला भंसाली की सांवरिया थी। कम फिल्मों में नजर आने के बाद भी जोहरा ने दर्शकों के दिलों में एक अलग ही छाप छोड़ी है।
3 of 5
जोहरा सहगल
- फोटो : सोशल मीडिया
जोहरा सहगल ने फिल्म 'चीनी कम' में अमिताभ बच्चन की मां की भूमिका निभाई थी। साल 2012 में जब जोहरा सहगल ने 100 साल पूरे किए थे तब अमिताभ बच्चन ने उन्हें '100 साल की बच्ची' कहा था। अमिताभ ने कहा था, 'एक प्यारी छोटी सी बच्ची की तरह हैं वो। इस उम्र में भी उनकी असीमित ऊर्जा देखते ही बनती है। मैंने उन्हें कभी भी निराश या किसी दुविधा में नहीं देखा वो हमेशा हंसती, खिलखिलाती रहती हैं।'
4 of 5
जोहरा सहगल
- फोटो : सोशल मीडिया
अमिताभ बताते हैं कि 'चीनी कम' के सेट पर जोहरा हमेशा सबको बड़े प्यार से पुरानी कहानियां सुनाया करती थीं। बीबीसी से बातचीत में अमिताभ ने आगे कहा था, 'जोहरा जी, पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर से जुड़ी थीं और पृथ्वीराज कपूर का मेरे पिता से बहुत करीबी रिश्ता था। जब भी पृथ्वीराज जी अपने नाटक के सिलसिले में इलाहाबाद आते, तो वहां हम सबकी जोहरा जी से ज़रूर मुलाकात होती थी।'
5 of 5
zohra sehgal
- फोटो : Social Media
बता दें, जोहरा सहगल को 1998 में पद्मश्री, 2001 में कालीदास सम्मान, 2004 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान भी मिले। संगीत नाटक अकादमी ने उन्हें लाइफ टाइव अचीवमेंट अवॉर्ड के तौर पर अपनी फेलोशिप भी दी। देश का सबसे बड़ा दूसरा नागरिक सम्मान पद्म विभूषण उन्हें 2010 में मिला। 10 जुलाई 2014 को उन्हें अस्पताल में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह 102 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गईं। कहते हैं कि उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा भी काफी मजे से बताई थी। वह कहती थीं कि मरने के बाद मुझे जलाया जाए और मेरी राख को बाद में फ्लश कर दिया जाए।