लॉकडाउन की वजह से दूरदर्शन के सुनहरे दिन वापस आ गए। 80- 90 के दशक की शानदार यादों को फिर से ताजा करने का मौका लोगों को मिला है। दूरदर्शन के सुनहरे दिनों में हमलोग, बुनियाद, ब्योमकेश बक्शी, तमस और मालगुडी डेज जैसे सीरियल आया करते थे। इस बीच एक विज्ञापन भी प्रसारित होता था 'मिले सुर मेरा तुम्हारा'। इस विज्ञापन ने पूरे भारत को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया था।
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मिले सुर मेरा तुम्हारा का स्क्रीनशॉट
- फोटो : Social Media
पंडित भीमसेन जोशी के बेटे जयंत जोशी ने एक इंटरव्यू में कहा था, "'तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता को दर्शाने वाला एक गीत चाहते थे। जिसका प्रस्ताव पंडित भीमसेन जोशी यानी मेरे पिता को मिला। जिसके बाद ये कंपोजिशन तैयार की गई थी।' मिले सुर मेरा तुम्हारा' जैसा विज्ञापन लोगों के बीच एकता का संदेश देने में कामयाब रहा था। आज भी यह लोगों की यादों में ताजा है।"
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मिले सुर मेरा तुम्हारा
- फोटो : सोशल मीडिया
लेकिन क्या आप जानते हैं इस गाने की कंपोजिशन को लेकर विवाद भी हुआ था। दरअसल जाने माने मराठी कंपोजर अशोक पाटकी का दावा था कि उन्होंने इस गाने को कंपोज किया है, वहीं पंडित भीमसेन जोशी के बेटे जयंत जोशी ने दावा किया कि ये गीत उनके पिता ने कंपोज किया है।
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मिले सुर मेरा तुम्हारा
- फोटो : सोशल मीडिया
इस गीत में खेल, कला, साहित्य और अन्य विधाओं से जुड़े जाने माने लोग शामिल हुए थे। इसमें अमिताभ बच्चन, जितेन्द्र, मिथुन, शबाना आजमी, मल्लिका साराभाई, हेमा मालिनी, कमल हासन, तनुजा और जावेद अख्तर सहित कई शख्सियतों ने देश के हर हिस्से का प्रतिनिधित्व किया था।
इसके दर्शकों का कहना है ये सिर्फ संगीत के सुर नहीं है। इसके जरिए भारत की विविधता और एक-दूसरे के प्रति परस्पर प्रेम-आदर को पेश किया गया था। इस गाने को देखकर एक बहुत बड़े तबके को अपना बचपन याद आ जाएगा। इस गीत को एक बार फिर से सुनिए और उस दौर की गायकी का लुत्फ उठाइए।
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