विष्णु पुराण में अब तक आपने देखा, हिरण्यकश्यपु खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए ब्रह्मा से वर मांगने जाता है। इस दौरान उसकी पत्नी कयादु गर्भवती होती है। हिरण्यकश्यपु की पत्नी गर्भवती होने के समय ओम् नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करती है। उसका पुत्र गर्भ में ही भगवान विष्णु की भक्ति करता है। इधर हिरण्यकश्यपु ब्रह्मा से वरदान पाने के लिए तपस्या करता है।
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विष्णु पुराण
- फोटो : सोशल मीडिया
हिरण्यकश्यपु की घोर तपस्या से घबराकर इंद्र सूर्य देव के पास जाते हैं और हिरण्यकश्यपु की तपस्या भंग करने के लिए कहते हैं। हालांकि सूर्य देव उसकी तपस्या भंग नहीं कर पाते। इधर इंद्र देव ब्रह्मा से विनती करते हैं कि उसे कोई वरदान न दें। लेकिन उसकी तपस्या से प्रभावित होकर उन्हें वरदान देने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हिरण्यकश्यपु ब्रह्मा से मृत्यु पर विजय पाने का वरदान मांगता है।
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ब्रह्मा ऐसा वरदान देने से इनकार कर देते हैं इसके बाद हिरण्यकश्यपु ब्रह्मा से यह वरदान मांगता है कि वह किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सकेगा न पशु द्वारा, न दिन में मारा जा सकेगा न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न किसी अस्त्र के प्रहार से और न किसी शस्त्र के प्रहार से उसक प्राणों को कोई डर रहेगा।
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यह वरदान पाकर वह अहंकारी बन जाता है और वह अपने को अमर समझने लगा। लेकिन आगे आप देखेंगे कि कैसे हिरण्यकश्यपु को मारने के लिए भगवान विष्णु को नृसिंह अवतार लेना पड़ेगा। हिरण्यकश्यपु के कई पुत्र थे। उनमें प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था।
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विष्णु पुराण के अनुसार जय विजय नाम के भगवान विष्णु के दो द्वारपाल श्राप के बाद हिरण्यकश्यपु व हिरण्याक्ष के रूप में जन्म लेते हैं। भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष का वध किया। अब आने वाले एपिसोड में हिरण्यकश्यपु के वध के लिए भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार होगा।