उनके सुर जब छिड़ते हैं तो हर कोई दीवाना हो जाता है। वह संगीत की साधना कुछ यूं करते हैं कि लोग अपनी सुध-बुध खो देते हैं। वैसे तो उन्हें हिंदुस्तानी संगीत में ख्याली गायिकी के लिए जाना जाता है, लेकिन ठुमरी, भजन और तराना में भी उनसे टक्कर लेने वाला कोई नहीं हुआ। बात हो रही है उस्ताद राशिद खान की, जो आज 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि अपनी आवाज का लोहा मनवा चुके राशिद अली खान को एक बार प्रोग्राम से पहले लात खानी पड़ गई थी और उसके बाद उन्होंने बेस्ट परफॉर्मेंस दी थी। क्या था वह किस्सा? क्यों पड़ी थी उस्ताद राशिद खान को लात और किसने की थी यह हिमाकत? अगर आपके मन में भी ये सवाल उमड़ रहे हैं तो यह खास रिपोर्ट सिर्फ आपके लिए ही तैयार की गई है।
Ustad Rashid Khan: जब लात खाने के बाद उस्ताद राशिद खान ने दी बेस्ट परफॉर्मेंस, क्या आपने सुना है यह किस्सा?
संगीतकार नहीं, क्रिकेटर बनना चाहते थे उस्ताद राशिद
यूं तो उस्ताद राशिद ने 11 साल की उम्र में दिल्ली में अपना पहला प्रोग्राम पेश कर दिया था, लेकिन वह संगीतकार नहीं बनना चाहते थे। दरअसल, वह क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन अपने परिवार की परंपरा से वह दूर नहीं रह पाए। वहीं, गजल और कुछ प्रोग्राम देखने के बाद संगीत के प्रति उनकी दिलचस्पी बढ़ गई। उस्ताद राशिद खान रामपुर-सहसवान घराना से ताल्लुक रखते हैं। वह उस्ताद इनायत हुसैन खान साहब के परपोते और गुलाम मुस्तफा खान के भतीजे हैं। हालांकि, उन्होंने संगीत की शिक्षा अपने मामा निसार हुसैन खान से ली थी। इसके अलावा उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से भी गुर सीखे। यह शिक्षा-दीक्षा उस वक्त ही शुरू हो गई थी, जब उस्ताद राशिद खान महज छह साल के थे।
बेहद खास है उस्ताद राशिद खान का अंदाज
एक जुलाई 1968 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में जन्मे उस्ताद राशिद खान ने शुद्ध भारतीय संगीत को हल्की संगीत शैलियों के साथ संयोजित करने का भी प्रयोग किया। इनमें नीना पिया (अमीर खुसरो के गाने) के साथ सूफी फ्यूजन रिकॉर्ड करने से लेकर पश्चिमी वाद्य यंत्र लुई बैंक्स के साथ प्रयोगात्मक संगीत कार्यक्रम करना तक शामिल है। इसके अलावा वह सितार वादक शाहिद परवेज और अन्य के साथ भी अपने संगीत के करतब दिखा चुके हैं। उस्ताद राशिद खान बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू दिखा चुके हैं। हम दिल दे चुके सनम का 'अलबेलो सजन आयो रे' और जब वी मेट का 'आओगे जब तुम हो साजना' उनके हुनर के चंद नगीनों में शामिल हैं।
पंडित भीमसेन जोशी ने यूं की थी तारीफ
वर्तमान में कोलकाता में रहने वाले उस्ताद राशिद खान की तारीफ पंडित भीमसेन जोशी ने बेहद खास अंदाज में की थी। उन्होंने राशिद खान को भारतीय संगीत का भविष्य बताया था। दरअसल, राशिद खान की गायकी रामपुर-सहसवान गायकी (गायन की शैली) ग्वालियर घराने से ताल्लुक रखती है। इसमें मध्यम गति, पूर्ण कंठ स्वर और जटिल लयबद्ध गायकी शामिल है। राशिद खान ने धीरे-धीरे अपने चाचा गुलाम मुस्तफा खान की शैली में अपने विलम्ब विचारों में स्पष्टता जोड़ दी है। इसके अलावा सरगम और टंकारी के इस्तेमाल में असाधारण कौशल विकसित किया। वह आमिर खान और भीमसेन जोशी की शैली से प्रभावित हैं। वह अपने गुरु की तरह गायन में माहिर हैं, लेकिन गाते अपने अंदाज में हैं।
किसने मारी थी उस्ताद राशिद को लात?
अब सवाल उठता है कि इतने बेहतरीन फनकार को आखिर लात किसने मारी, वह भी कार्यक्रम से ठीक पहले? इस पूरे मामले का खुलासा खुद उस्ताद राशिद खान ने किया था। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया था कि एक प्रोग्राम से पहले वह सुस्ती के मूड में थे। इससे उनके मामा और गुरु निसान हुसैन खान बेहद नाराज हो गए। उन्होंने उस्ताद राशिद खान को जोरदार लात मार दी। उस्ताद राशिद बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने अपनी सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस दी थी।