उस्ताद गुलाम सादिक खान एक भारतीय शास्त्रीय संगीत थे। उन्हें गायकी में महारत हासिल थी देश से लेकर विदेश तक में उन्होंने अपने संगीत का जादू चलाया था। लोग उनकी आवाज और गायकी के कायल थे। भले ही आज वह इस दुनिया में न हो, लेकिन उनके संगीत अब भी लोगों के जहन में हैं। आज उस्ताद गुलाम सादिक पुण्यतिथि है। चलिए इस मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें...
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उस्ताद गुलाम सादिक खान
- फोटो : सोशल मीडिया
उस्ताद गुलाम सादिक का जन्म 22 अगस्त को रामपुर उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह रामपुर-सहसवान घराने के थे। उन्होंने बचपन से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था। महज नौ साल की उम्र से ही उनके पिता उस्ताद गुलाम जाफर खान ने उन्हें संगीत की दीक्षा दी थी। उस्ताद के पिता एक भारतीय सारंगी वादक थे। बाद में गुलाम सादिक ने उस्ताद मुश्ताक हुसैन खान से संगीत का प्रशिक्षण लिया, जिन्हें भारत में पहला पद्म भूषण मिला था।
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उस्ताद गुलाम सादिक खान
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उस्ताद गुलाम सादिक ख्याल गायकी में विशेषज्ञता हासिल की थी। इसके साथ उन्होंने ठुमरी, दादरा और भजन भी गाए। उन्होंने देश विदेश में प्रसिद्धि हासिल की। उस्ताद ने भारत और विदेशों में यूके, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, ओमान, मॉरीशस, सिंगापुर, हांगकांग, इंडोनेशिया, थाईलैंड, चीन और अफगानिस्तान में प्रदर्शन किया। वह आकाशवाणी और दूरदर्शन के शीर्ष श्रेणी के कलाकार थे।
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उस्ताद गुलाम सादिक खान
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उस्ताद ने बॉलीवुड सिंगर जसपिंदर नरूला और उनके बेटे ख्याल गजल गायक उस्ताद गुलाम अब्बास खान सहित कई लोगों को संगीत की शिक्षा दी। साथ ही उन्होंने अपने पोते गुलाम हसन खान को भी शिक्षा दी, जो एक हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक हैं। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में संगीत संकाय में सीनियर लेक्चरर के रूप में काम किया।
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उस्ताद गुलाम सादिक खान को पद्मश्री से सम्मानित करते पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम
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साल 2005 में उस्ताद गुलाम सादिक को भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिए पद्मश्री से नवाजा गया। उस्ताद के घराने में कई लोगों को पद्म श्री से नवाजा जा चुका है। शुरुआत में उस्ताद ने काफी संघर्ष और मुश्किलों का सामना किया। आखिरकार उन्होंने सफलता हासिल की। वहीं, 15 मई 2016 को गुलाम सादिक खान का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।