शेखर कपूर की फिल्म मिस्टर इंडिया में बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत करने वाले अहमद खान का हुनर दुनिया ने राम गोपाल वर्मा की फिल्म रंगीला में देखा। सुभाष घई ने उन्हें फिल्म ताल में कोरियाग्राफर बनाया, लेकिन किस्मत ने उन्हें बना दिया फिल्म निर्देशक। अहमद की नई फिल्म बागी 3 आज रिलीज हो रही है।
निर्देशक अहमद खान को अपनी फिल्मों के एक्शन के लिए तमाम पुरस्कार मिल चुके हैं। लिहाजा इस मुलाकात में पहला सवाल यही होता है कि टाइगर श्रॉफ का एक्शन दर्शकों ने 'बागी' की पिछली किस्तों में भी देखा, फिल्म 'वॉर' में तो वह दुनिया के नामचीन स्टंट निर्देशकों के साथ काम कर चुके हैं तो 'बागी 3' में अलग क्या है?
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बागी 3 पोस्टर
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
अहमद एक्शन में इमोशन का पेंच फंसाते हैं, 'एक्शन में हमेशा दो चीजें चाहिए होती हैं। थोड़ा सा नयापन और उसका भावनाओं से जुड़ाव। 'बागी 3' में हमने एक्शन का स्तर पिछली फिल्मों से काफी बड़ा रखा है। फिल्म के सारे एक्शन लाइव शूट किए गए हैं। फिल्म में कुछ भी यूं ही नहीं हो रहा है।'
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अहमद खान
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
आपको काम करते हुए 30 साल से ऊपर हो चुके हैं, सफलता जल्दी हासिल हो जाती है तो उसे बनाए रखना कितना मुश्किल होता है? अहमद के चेहरे की चमक बढ़ती है, वह कहते हैं, 'मैं हूं 90 के दशक का। मेरे साथ के जितने भी लोग (फिल्मकार, कोरियोग्राफर) हैं वे या तो खत्म हो चुके हैं या फिर स्ट्रगल कर रहे हैं। मुझे आज ऐसा लगता है कि मैं अपने करियर के शीर्ष पर हूं। इस वजह से ही मैं बहुत अधिक खुलकर सामने नहीं आता हूं। मुझे हर साल चार से पांच रियलिटी शो ऑफर होते हैं लेकिन मैं दो साल में कोई एक करता हूं। मैंने गाने अधिक नहीं किए हैं और जो भी करता हूं उसे ठोक बजाकर करता हूं। जब हमें सफलता पहले मिल जाती है तो उसे बनाए रखना एक चुनौती है।'
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बागी 3
- फोटो : सोशल मीडिया
अहमद खान की मुख्य पहचान अब भी कोरियाग्राफर (नृत्य निर्देशक) वाली ही है। देश में डांस की दशा और दिशा के बारे में वह कहते हैं, 'मैंने अपने कोरियाग्राफी करियर में एक चीज अनुभव की है कि भले विदेशों में समानता बनी रहे भारत में ये लगातार बदलता रहता है। डांस में मॉडर्न वेस्टर्न, स्लो मोशन, भांगड़ा जैसे ट्रेंड बारी-बारी से आए और चले गए। हम हमेशा सीखना चाहते हैं। हम चुनौतियों को पसंद करने वाले लोग हैं।'