चैत्र नवरात्र के दौरान सुबह शाम मां की भेंटों से वैष्णो धाम गूंज रहा है। कोरोना महामारी के बीच भी श्रद्धालु दर्शन के लिए मां के भवन पहुंच रहे हैं। बीते रोज तुलसी कुमार ने भी माता के दरबार में हाजिरी लगाई। तुलसी के बारे में ये बताना जरूरी है कि वे गुलशन कुमार की बेटी हैं। जीहां वही वैष्णो माता के भक्त गुलशन कुमार जिनकी मंदिर के बाहर हत्या कर दी गई थी। कैसेट किंग के नाम से मशहूर टी सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की कहानी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
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गुलशन कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
दिल्ली में जूस की दुकान चलाने वाले गुलशन कुमार के बारे में कौन जानता था कि एक दिन वो ऐसे शख्स बनकर उभरेंगे जिसके पीछे अंडरवर्ल्ड पड़ जाएगा। 80 के दशक में उन्होंने टी सीरीज की स्थापना की। भगवान के भजन गाकर उन्होंने इतना नाम कमाया कि लोग उन्हें कैसेट किंग के नाम से जानने लगे।
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गुलशन कुमार
- फोटो : Twitter
गुलशन कुमार वैष्णो देवी के भक्त थे। वैष्णो देवी में उनकी गहरी आस्था थी। उन्होंने वैष्णो देवी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काफी सारे काम करवाए। लेकिन उनके ये सभी नेक काम अंडरवर्ल्ड की आंखों में खटकने लगे और फिर आया वो दिन जिसकी किसी ने कल्पना ही नहीं की थी। जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर उनपर 16 गोलियां चलाई गईं।
गुलशन कुमार के ड्राइवर अपने मालिक को बचाने के लिए हत्यारों पर कलश फेंकते रहे लेकिन हत्यारें नहीं रुके। उन्होंने ड्राइवर के पैर पर भी गोली चलाई, जिससे वो वहीं जख्मी हो गया। देखते ही देखते उनकी जान चली गई। जानकारी के मुताबिक अबु सलेम ने गुलशन कुमार को मारने की जिम्मेदारी दाऊद मर्चेंट और विनोद जगताप नाम के शार्प शूटरों को दी थी। 9 जनवरी 2001 को विनोद जगताप ने कुबूल किया कि उसने ही गुलशन कुमार को गोली मारी।
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गुलशन कुमार
- फोटो : Social Media
हालांकि गुलशन कुमार के मर्डर की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी। हुसैन जैदी ने अपनी किताब My Name is Abu Salem में लिखा था कि डॉन अबु सलेम ने गुलशन कुमार से 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। हालांकि गुलशन कुमार ने इसे देने से साफ इनकार कर दिया था। अंडरवर्ल्ड से लगातार फोन आते रहे लेकिन गुलशन कुमार नहीं डरे।