5 सितंबर यानी आज शिक्षक दिवस हर अध्यापक और छात्र की जिंदगी का सबसे खास दिन माना जाता है। इस दिन स्कूल और कॉलेज के सीनियर्स छात्रों को एक दिन का टीचर बनने का मौका मिलता है। भारत के पहले पूर्व उप राष्ट्रपति और दूसरे पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के मौके पर 'शिक्षक दिवस' मनाया जाता है। बता दें कि एक अध्यापक का छात्रों की जिंदगी में बहुत बड़ा रोल होता है और ऐसा ही कुछ फिल्मों में भी देखने को मिला है...तो आइए जानते हैं इन फिल्मों के बारे में..
हिचकी (2018)
साल 2018 में ही रिलीज हुई फिल्म 'हिचकी' ने भले ही बॉक्स ऑफिस पर कमाल ना किया हो लेकिन एक शैक्षिक नजरिए से यह फिल्म बहुत कुछ सिखा जाती है। फिल्म में रानी मुखर्जी ने एक टीचर का रोल प्ले किया है जो हिचकी की समस्या से जूझ रही है। फिर भी रानी ने अपनी इस समस्या को ताकत बनाकर स्कूल में बच्चों को नये तरीके से पढ़ाकर एक मिसाल कायम की है।
चॉक एंड डस्टर (2016)
बात करेंगे फिल्म 'चॉक एंड डस्टर' की जो साल 2016 में रिलीज हुई थी। फिल्म में एक्ट्रेस शबाना आजमी और जूही चावला मुख्य रोल में हैं। यह फिल्म भारतीय प्राइवेट शिक्षा व्यवस्था के व्यवसायीकरण पर आधारित है। यह फिल्म अध्यापकों और छात्रों के बीच कम्यूनिकेशन और उन आपसी समस्याओं पर प्रभाव डालती हैं जो दिन प्रति-दिन बदलती और बढ़ती जा रही हैं। वहीं, जूही ने टीचर के रोल में इस बात को बताने की कोशिश की है कि क्लास का हर छात्र अपनी औलाद की तरह होता है, उसे भी वैसे ही सिखाना और पढ़ाना चाहिए जैसे हम अपने बच्चों को सिखाते हैं।
जागृति (1954)
फिल्म 'जागृति' अजय नामक एक शरारती लड़के से शुरू होती है जो स्कूल के सभी अध्यापक की नाक में दम करके रखता है। वहीं, एक्टर अभि भट्टाचार्य ने हॉस्टल के नये सुपरिन्टेन्डेन्ट शेखर बाबू का रोल प्ले किया है जो एक तजुर्बेकार शिक्षक हैं जो अपरंपरागत तरीके से बच्चों को पढ़ाना लिखाना जानते हैं। लेकिन सारे शरारती लड़के सीधी राह पर आ जाते हैं सिवाय अजय के। शेखर अजय को सुधारने की बहुत कोशिश करता है मगर असफल रहता है। एक फ़ुटबॉल मैच में अजय अपने विरोधी पक्ष वाले एक लड़के को जानबूझकर लात मारकर घायल कर देता है। शेखर बाबू भी ग़ुस्से में आ जाते हैं और उसको खेल के मैदान से बाहर निकालकर सारे बच्चों को हिदायत देते हैं कि कोई भी अजय से अगले एक हफ्ते के लिए बातचीत न करे।
तारे जमीन पर (2007)
साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म 'तारे जमीन पर' की जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है। फिल्म एक मोड़ पर हंसाती है तो वही दूसरे मोड़ पर आंसू लाने पर मजबूर कर देती है। फिल्म में आमिर खान ने एक अध्यापक का रोल प्ले किया है जो ईशान अवस्थी जैसे कमजोर छात्र के साथ-साथ पूरे स्कूल सिस्टम को बदल कर रख देता है। असल मायने में देश के शिक्षा सिस्टम और अध्यापकों की स्थिति सुधारने के लिए ऐसे अध्यापकों की बहुत जरूरत है।