'कोशिश करने वालों की हार नहीं होती...' इस बात को हाल फिलहाल में सोनू सूद से बेहतर किसी ने साबित नहीं किया है। कोरोना काल में सोनू सूद हजारों- लाखों लोगों के लिए मसीहा साबित हुए हैं। सोनू सूद पिछले कई दिनों से कई प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंदों के लिए न सिर्फ भोजन आदि की व्यवस्था कर रहे हैं बल्कि साथ ही साथ उन्हें उनके घर भी पहुंचा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सुपरहीरो की तरह सामने आए सोनू सूद ने अमर उजाला से खुलकर कई मुद्दों पर बात की।
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सोनू सूद
- फोटो : Social Media
'प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने की प्रेरणा कैसे मिली' के सवाल पर सोनू सूद ने कहा, 'मैं हमेशा से ये मानता रहा हूं कि हम जिन भी घरों में रहते हैं, वो इन प्रवासी मजदूरों ने बनाए हैं। हम जिन सड़कों पर चलते हैं वो इन लोगों ने बनाई हैं। जिन सेट्स पर हम शूट करते हैं, वो बनाने के लिए भी यही मजदूर मेहनत करते हैं। ऐसे में जब एक ऐसा वक्त आया जब वो अपने घर जाना चाह रहे थे और नहीं जा पा रहे थे तो हम कैसे फेल हो गए उनकी मदद करने में। हमारी ह्यूमेनिटी (मानवता) पर सीधे इसका असर पड़ा।'
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Sonu Sood
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सोनू आगे कहते हैं, 'हम करीब हर दिन 40 से 45 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। कई ऐसे इलाके हैं जहां पर मजदूर बड़ी संख्या में रहते हैं। ऐसे में जब उन इलाकों में पहुंचे तो देखा कि वो अपने छोटे- छोटे बच्चों के साथ जा रहे हैं। जब मैंने उनसे पूछा कि आप कैसे जाएंगे, मत जाइए, तो उन मजदूरों ने कहा कि हम पैदल ही निकल जाएंगे। उनके इरादे इतने मजबूत थे कि वो 300 से लेकर 700 किलोमीटर तक भी पैदल जाने को तैयार थे।'
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सोनू सूद
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बातचीत में सोनू ने आगे बताया, 'मैंने उनसे विनती कि आप ऐसे मत जाओ और मुझे दो दिन का वक्त दो, मैं कुछ न कुछ कोशिश करता हूं। इसके बाद मैंने कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकार के कई कार्यालयों में बात की और सभी ने मेरी मदद की। कई कागजी कार्रवाई हुईं, इसके बाद सारी परमिशन्स लेने के बाद पहली बार लोगों को हमने कर्नाटक भेजा।'
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सोनू सूद
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सोनू सूद ने आगे कहा, 'जब लोग जा रहे थे तो जो उनकी आंखों में आंसू थे और चेहरे पर मुस्कान थी, उस मुस्कान को मैं कभी नहीं भूल सकता। तब मुझे अहसास हुआ कि ये सिर्फ 350 लोग नहीं हैं, बल्कि ऐसे लाखों लोग हैं जो अभी भी सड़कों पर घूम रहे हैं और हमें उनको उनके घर पहुंचाना है। इसके बाद मैंने बाकी इस काम में और दमखम लगाया और प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने का बीड़ा उठाया।'