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सेंसर बोर्ड: छह महीने अटकी रही 'जन नायकन', ‘सतलुज’ को रिलीज होने में लगे तीन साल; फिल्में जिनको किया गया बैन
Fri, 18 Sep 2026 06:05 AM IST
गोधूलि श्रीवास्तव
एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला
Published by: गोधूलि श्रीवास्तव
Updated Fri, 18 Sep 2026 06:05 AM IST
सार
Films Stucked in Censor Row: सेंसर बोर्ड (CBFC) इस साल की शुरुआत से ही चर्चा में रहा है। पहले साल की शुरुआत में फिल्म 'जन नायकन' को सेंसर सर्टिफिकेट ना देने के चलते खूब बवाल मचा। फिर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को तीन साल तक सर्टिफिकेट नहीं मिला और जब मिला तो यह 48 घंटे के अंदर बैन कर दी गई। पढ़िए सीबीएफसी की कहानी की दूसरी किश्त में ऐसे ही बैन की गईं या सिनेमाघरों में ना रिलीज हो पाई फिल्मों के बारे में...
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कहानी सीबीएफसी की भाग 2
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बुधवार को आपने कहानी सीबीएफसी की के पहले भाग में सेंसर बोर्ड की शुरुआत, भारत में इसके गठन और इसके कानून में समय -समय होते संशोधन के बारे में पढ़ा।
अब इसके दूसरे और अंतिम भाग में पढ़िए 'जन नायकन' और 'सतलुज' जैसी उन फिल्मों के बारे में जो सेंसर बोर्ड के चलते अटकी रहीं। इसके अलावा भी कई ऐसी फिल्में हैं जो आज तक सर्टिफिकेट मिलने और रिलीज डेट मिलने का इंतजार कर रही हैं।
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अब इसके दूसरे और अंतिम भाग में पढ़िए 'जन नायकन' और 'सतलुज' जैसी उन फिल्मों के बारे में जो सेंसर बोर्ड के चलते अटकी रहीं। इसके अलावा भी कई ऐसी फिल्में हैं जो आज तक सर्टिफिकेट मिलने और रिलीज डेट मिलने का इंतजार कर रही हैं।
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फिल्म 'किस्सा कुर्सी का'
- फोटो : सोशल मीडिया
किस्सा कुर्सी का (1975)
फिल्म 'किस्सा कुर्सी' का तब रिलीज की तैयारी में थी जब देश में इमरजेंसी लगी थी। फिल्म में इंदिरा गांधी और संजय गांधी के साथ-साथ सरकार की नीतियों पर भी तंज कसे गए थे। जब फिल्म बोर्ड में पहुंची तो जमकर बखेड़ा हुआ।
फिल्म पर 51 आपत्तियां लगाई गईं। इसका निर्देशन अमृत नाहटा ने किया था। फिल्म को लेकर संजय गांधी पर गंभीर आरोप लगाए गए। इसी तरह गुलजार की फिल्म ‘आंधी’ को भी इमरजेंसी की वजह से रोक दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौर में हर फिल्म को रिलीज करने से पहले सरकार देखती थी।
फिल्म 'किस्सा कुर्सी' का तब रिलीज की तैयारी में थी जब देश में इमरजेंसी लगी थी। फिल्म में इंदिरा गांधी और संजय गांधी के साथ-साथ सरकार की नीतियों पर भी तंज कसे गए थे। जब फिल्म बोर्ड में पहुंची तो जमकर बखेड़ा हुआ।
फिल्म पर 51 आपत्तियां लगाई गईं। इसका निर्देशन अमृत नाहटा ने किया था। फिल्म को लेकर संजय गांधी पर गंभीर आरोप लगाए गए। इसी तरह गुलजार की फिल्म ‘आंधी’ को भी इमरजेंसी की वजह से रोक दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौर में हर फिल्म को रिलीज करने से पहले सरकार देखती थी।
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फिल्म 'पांच'
- फोटो : सोशल मीडिया
पांच (2001)
इस फिल्म को 2001 में कुछ कट और संशोधन समिति द्वारा समीक्षा के बाद मंजूरी मिल गई थी। फिर भी निर्माताओं के साथ अन्य मतभेदों और फिल्म की समग्र रूप से भयावह प्रकृति के चलते इसे रिलीज नहीं होने दिया गया।
पिछले साल खबरें थीं कि यह फिल्म रिलीज हो सकती है पर यह सिर्फ अफवाह निकली। यह निर्देशन अनुराग कश्यप की डेब्यू फिल्म थी।
इस फिल्म को 2001 में कुछ कट और संशोधन समिति द्वारा समीक्षा के बाद मंजूरी मिल गई थी। फिर भी निर्माताओं के साथ अन्य मतभेदों और फिल्म की समग्र रूप से भयावह प्रकृति के चलते इसे रिलीज नहीं होने दिया गया।
पिछले साल खबरें थीं कि यह फिल्म रिलीज हो सकती है पर यह सिर्फ अफवाह निकली। यह निर्देशन अनुराग कश्यप की डेब्यू फिल्म थी।
फिल्म 'गुलाबी आइना'
- फोटो : सोशल मीडिया
गुलाबी आईना (2003)
- ट्रांसजेंडर की कहानी पर बनी यह फिल्म ‘गुलाबी आईना' को भी बोर्ड ने 2003 मे बैन कर दिया था।
- श्रीधर रंगायन द्वारा निर्मित यह फिल्म काफी विवादों में घिरी रही।
- फिल्म के प्रमाणीकरण को लेकर विवाद होने की वजह से इसे रिलीज की मंजूरी नहीं मिली।
- हालांकि फिल्म 70 से अधिक फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी है।
- इसने कई पुरस्कार भी जीते और और अब ओटीटी प्लैटफॉर्म पर स्ट्रीम हो रही है।
फिल्म 'ब्लैक फ्राईडे'
- फोटो : सोशल मीडिया
ब्लैक फ्राईडे (2004)
फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' को सिनेमाघरों तक आने में 4 साल लग गए। फिल्म को 1993 के मुंबई बम धमाकों से जोड़ा गया था। बाम्बे हाई कोर्ट मे चल रही जांच और संवेदनशील विषय की वजह से इस पर सेंसर बोर्ड ने तीन साल का बैन लगाया। फिल्म लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2007 में यह रिलीज हुई।
फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' को सिनेमाघरों तक आने में 4 साल लग गए। फिल्म को 1993 के मुंबई बम धमाकों से जोड़ा गया था। बाम्बे हाई कोर्ट मे चल रही जांच और संवेदनशील विषय की वजह से इस पर सेंसर बोर्ड ने तीन साल का बैन लगाया। फिल्म लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2007 में यह रिलीज हुई।
फिल्म 'वाॅटर'
- फोटो : सोशल मीडिया
वाॅटर (2007)
- दीपा मेहता की फिल्म ‘वाॅटर’ में विधवा जीवन, बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराईयों को दिखाया गया था।
- मगर इसे फिल्माने का तरीका कुछ समूहों को पसंद नहीं आया जिसके चलते इस फिल्म का सेट नष्ट कर दिया गया।
- इस हंगामे के बाद आखिरकार फिल्म को श्रीलंका में शूट किया गया। फिल्म की पटकथा में जातियां बदल दी गईं।
- भारत में भी फिल्म को लेकर कई विवादों के बाद, सेंसर बोर्ड ने इसे 'U' सर्टिफिकेट के साथ मंजूरी दे दी।
- फिल्म को 2007 में प्रमाणीकरण दिया गया। 9 मार्च 2007 में यह भारत में रिलीज हुई।
फिल्म 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का'
- फोटो : सोशल मीडिया
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का (2016)
सीबीएफसी ने फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को सर्टीफिकेट देने से इंकार कर दिया था। क्योंकि फिल्म में सेक्सुअलिटी को सही तरह न पेश करने की बात कही गई थी। इस फैसले के बाद में सेंसर बोर्ड ने इसे ‘ए’ रेटिंग दी, जिसके बाद फिल्म को लेकर घरेलू और विदेशी सिनेमा जगत में खूब चर्चा रही।
सीबीएफसी ने फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को सर्टीफिकेट देने से इंकार कर दिया था। क्योंकि फिल्म में सेक्सुअलिटी को सही तरह न पेश करने की बात कही गई थी। इस फैसले के बाद में सेंसर बोर्ड ने इसे ‘ए’ रेटिंग दी, जिसके बाद फिल्म को लेकर घरेलू और विदेशी सिनेमा जगत में खूब चर्चा रही।
फिल्म 'उड़ता पंजाब'
- फोटो : सोशल मीडिया
‘उड़ता पंजाब’
- 2016 में फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को भी सेंसर बोर्ड से पास होने के लिए काफी मश्क्कत करनी पड़ी।
- सेंसर बोर्ड के नियम अनुसार फिल्में देश की नीतियों, किसी क्षेत्र/राज्य विशेष, धर्म, संप्रदाय और व्यक्ति को गलत ढंग से नहीं दिखा सकतीं।
- बोर्ड के मुताबिक फिल्म में 'पंजाब' को गलत तरीके से दर्शाया गया था। इसकी कहानी की मानें तो पंजाब के 70 फीसदी लोग नशे में रहते हैं।
- फिल्म में 94 कट लगाने के बाद इसे 'A' सर्टिफिकेट के साथ जून 2016 में रिलीज किया गया।
पद्मावत फिल्म
- फोटो : सोशल मीडिया
पद्मावत (2018)
2017 में बॉलीवुड फिल्म 'पद्मावती' की रिलीज के खिलाफ काफी प्रदर्शन हुए। फिल्म पर सबसे पहले राजपूत करणी सेना ने विरोध जताया। इतिहास विकृत करने और रानी पद्मिनी को अपमानित तरीके से प्रस्तुत करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई।
प्रदर्शनों में हिंसा पूरी तरह शामिल थी। इसमें सेटों पर की गई तोड़फोड़ से लेकर फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली पर किया गया हमला तक शामिल था। आखिरी मेकर्स को फिल्म का नाम बदलकर 'पद्मावत' करना पड़ा। इसके अलावा सेंसर बोर्ड के आदेश पर पांच सुधार किए गए, तब जाकर 25 जनवरी 2018 को फिल्म रिलीज हुई।
2017 में बॉलीवुड फिल्म 'पद्मावती' की रिलीज के खिलाफ काफी प्रदर्शन हुए। फिल्म पर सबसे पहले राजपूत करणी सेना ने विरोध जताया। इतिहास विकृत करने और रानी पद्मिनी को अपमानित तरीके से प्रस्तुत करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई।
प्रदर्शनों में हिंसा पूरी तरह शामिल थी। इसमें सेटों पर की गई तोड़फोड़ से लेकर फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली पर किया गया हमला तक शामिल था। आखिरी मेकर्स को फिल्म का नाम बदलकर 'पद्मावत' करना पड़ा। इसके अलावा सेंसर बोर्ड के आदेश पर पांच सुधार किए गए, तब जाकर 25 जनवरी 2018 को फिल्म रिलीज हुई।
फिल्म 'कश्मीर फाइल्स'
- फोटो : सोशल मीडिया
कश्मीर फाइल्स (2022)
2022 में रिलीज हुई कश्मीर फाइल्स की रिलीज पर भी देश में काफी विवाद हुए थे, क्योंकि यह एक संवेदनशील विषय पर आधारित थी। कश्मीरी पंडितों के पलायन पर बनी इस फिल्म का विवेक अग्निहोत्री ने निर्देशन किया था।
शुरुआत में फिल्म के लेकर खूब विरोध हुआ। मगर सेंसर बोर्ड से इसे A सर्टिफिकेट के साथ हरी झंडी मिली। फिल्म के रिलीज होने के बाद इसकी काफी प्रशंसा हुई।
2022 में रिलीज हुई कश्मीर फाइल्स की रिलीज पर भी देश में काफी विवाद हुए थे, क्योंकि यह एक संवेदनशील विषय पर आधारित थी। कश्मीरी पंडितों के पलायन पर बनी इस फिल्म का विवेक अग्निहोत्री ने निर्देशन किया था।
शुरुआत में फिल्म के लेकर खूब विरोध हुआ। मगर सेंसर बोर्ड से इसे A सर्टिफिकेट के साथ हरी झंडी मिली। फिल्म के रिलीज होने के बाद इसकी काफी प्रशंसा हुई।
फिल्म 'जन नायकन'
- फोटो : सोशल मीडिया
जन नायकन (2026)
थलापति विजय की फिल्म 'जन नायकन' को पहले 9 जनवरी को पोंगल के मौके पर रिलीज करने का प्लान था, लेकिन सेंसर बोर्ड से जुड़ी समस्याओं की वजह से रिलीज टाल दी गई। 'जन नायकन' में कुछ राजनीतिक सीन और डायलॉग होने की वजह से सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई थी, इसलिए फिल्म को दोबारा समिति के सामने दिखाया गया।
मुंबई में एक नई समिति ने फिल्म देखी और कुछ बदलाव सुझाए। इसके बाद भी फिल्म काे सर्टिफिकेट मिलने में बहुत समय लगा। आखिरकार 10 मई 2026 को थलापति विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और 23 जुलाई 2026 को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
थलापति विजय की फिल्म 'जन नायकन' को पहले 9 जनवरी को पोंगल के मौके पर रिलीज करने का प्लान था, लेकिन सेंसर बोर्ड से जुड़ी समस्याओं की वजह से रिलीज टाल दी गई। 'जन नायकन' में कुछ राजनीतिक सीन और डायलॉग होने की वजह से सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई थी, इसलिए फिल्म को दोबारा समिति के सामने दिखाया गया।
मुंबई में एक नई समिति ने फिल्म देखी और कुछ बदलाव सुझाए। इसके बाद भी फिल्म काे सर्टिफिकेट मिलने में बहुत समय लगा। आखिरकार 10 मई 2026 को थलापति विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और 23 जुलाई 2026 को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
फिल्म 'सतलुज'
- फोटो : X
सतलुज (2026)
यह खबर भी पढ़ें: सेंसर बोर्ड: पेरिस त्रासदी के बाद बना कानून जिसने बदली भारतीय सिनेमा की तस्वीर, क्या है सीबीएफसी और इसके नियम?
- हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी फिल्म 'पंजाब 95' रिलीज के लिए तीन साल से इंतजार कर रही थी।
- शुरुआत में सीबीएफसी ने मेकर्स को फिल्म का शीर्षक बदलने का सुझाव दिया।
- इस सुझाव के चलते फिल्म का नाम 'पंजाब 95' से बदलकर 'सतलुज' कर दिया गया।
- इस बदलाव के बाद जब मेकर्स एक बार फिर सीबीएफसी पहुंचे तो उसमें 21 कट्स बताए गए।
- जैसे- जैसे वक्त गुजरा सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट्स लगाने का सुझाव दे दिया।
- काफी वक्त तक फिल्म निर्देशक हनी त्रेहान ने इस बात पर सहमति नहीं जताई।
- इसके चलते फिल्म की रिलीज डेट खिसकती चली गई और अंत में मेकर्स ने इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया गया।
- 3 जुलाई 2026 को यह फिल्म रिलीज हुई और इसके 48 घंटों के अंतर्गत ही यानी 5 जुलाई को इसे ओटीटी से हटा दिया गया।
- फिल्म की कहानी 1984 से लेकर 1995 तक पंजाब के हालात दिखाती है, जिसके चलते इसे ओटीटी से भी बैन कर दिया गया।
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