एक्ट्रेस ने राजनेता बनीं स्मृति ईरानी ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अक्ष्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी में मात दी। वो अपनी जीत का जश्न मना ही रही थीं कि अमेठी में ही उनके करीबी भाजपा नेता व बरौलिया गांव के पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह की शनिवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। ये खबर सुनकर स्मृति खुद को रोक नहीं पाई और दिल्ली से सीधे अमेठी पहुंचीं।
स्मृति ईरानी के कितना करीब था वो शख्स जिसका हुआ कत्ल?, खुद देने गईं अर्थी को कंधा और रो पड़ीं
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नई दिल्ली से अमेठी परिवार से मुलाकात करने पहुंचीं स्मृति इरानी ने सुरेंद्र के हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़वाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर स्मृति ईरानी भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू छलक आए। सुरेंद्र सिंह की शवयात्रा के दौरान उनके शव को कंधा देती भी दिखीं। बरौलिया गांव गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का गोद लिया गांव था। स्मृति ने प्रचार के दौरान इसी गांव में जूते बांटे थे। लोकसभा चुनाव में सुरेंद्र ने स्मृति के चुनाव प्रचार में अहम रोल निभाया था। वे ज्यादातर जगहों पर सुरेंद्र के साथ ही प्रचार करने जाती थीं। सुरेंद्र अक्सर उनके साथ रैलियों में नजर आते थे। सुरेंद्र का प्रभाव कई गांवों में था। जिसका फायदा स्मृति को चुनाव प्रचार में मिला। कांग्रेस के गढ़ अमेठी में कमल खिलाने का श्रेय काफी हद तक सुरेंद्र सिंह को भी जाता है।
फिलहाल गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। वारदात के बाद छापेमारी करते हुए पुलिस ने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। ग्रामीणों के अनुसार, देर रात दो बाइक सवार बदमाश आए और उन्हें घर से बाहर बुलाया। सुरेंद्र जैसे ही बाहर आए बदमाशों ने उनके सिर में गोली मारकर हत्या कर दी और फरार हो गए। घायल अवस्था में ग्रामीण उन्हें पीएचसी ले गए। जहां डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर बताते हुए लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ ले जाते वक्त रास्ते में ही सुरेंद्र ने दम तोड़ दिया।
हत्या का कारण चुनावी रंजिश बताया जा रहा है। इलाके में सुरेंद्र का काफी प्रभाव था जिसका लाभ स्मृति ईरानी को मिला। करीबी बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में स्मृति की जीत के बाद उनका कद काफी बढ़ गया था जिसे कुछ लोग पसंद नहीं करते थे। वह स्मृति ईरानी के काफी करीबी थे।
राजनीति में आने से पहले स्मृति ईरानी टेलीविजन का मशहूर चेहरा रही हैं। हालांकि टीवी से राजनीति तक का सफर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) के लिए आसान नहीं था। स्मृति ईरानी ने इस लंबे सफर में काफी उतार चढ़ाव देखे। खास बात यह है कि इतने साल में स्मृति ईरानी में काफी बदलाव आए।