के के यानी कृष्णकुमार कुन्नथ, दिल्ली की जवानी, मुंबई की शोहरत और कोलकाता में शांति, हमेशा हमेशा के लिए। के के शांति के ही पुजारी रहे, शुरू से। स्टूडियो उनके लिए किसी उपासना स्थल से कम नहीं रहा। वह कहते भी थे, ‘अगर आपको खाना बनाने का धर्म पता है तो आप संगीत के सच्चे उपासक हो सकते हैं। जीवन का सबसे सच्चा और निष्कपट काम है खाना बनाना। और, दूसरा गाना। मेरे लिए संगीत स्टूडियो एक रसोई है जिसमें मैं सब कुछ स्वादानुसार डालकर एक गीत पकाता हूं। इसी में मुझे सुकून मिलता है।’ दिल्ली से मुंबई आए जिस किशोर ने हमेशा अपनी सारी ऊर्जा मंच के लिए बचाकर रखने की बात की, उसने मंगलवार की शाम मंच से ही अपने चाहने वालों को अलविदा कह दिया। ये ‘पल’ अब कभी न आएगा।
विरासत में पाई गायकी
दो साल की उम्र में मंच पर पहली बार गाना गाने वाले के के एक दो दिन के लिए ही स्कूल गए संगीत सीखने। जो सुर दूसरे बच्चों को सीखने में महीनों लगते थे वह दो दिन में उसका अभ्यास और प्रदर्शन करके घर वापस आ गए। घर में बोल दिया मुझे अब स्कूल नहीं जाना। घर में सब संगीत के ही पुजारी थे। पिता संगीत के शौकीन थे। मां गाती थीं। नानी भी संगीत की पुरोधा थीं। मोहम्मद रफी से लेकर किशोर कुमार और येशुदास से लेकर पी सुशीला तक, हर सुरमयी गीत के के को भाता था। वह किसी भी राग को सुनकर उसे तुरंत गा सकने का ईश्वरीय आशीर्वाद पाने वाले गिने चुने गायकों में से थे। के के को ये भी बहुत बाद में पता चला कि उनकी तरह किशोर कुमार ने भी कहीं से संगीत सीखा नहीं था। कहते, ‘मुझे जिस दिन ये पता चला बहुत सुकून मिला।’
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लाइव परफॉर्मेंस के दौरान सिंगर केके का निधन
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‘तड़प तड़प के..’
हिंदी सिनेमा में अपने पहले गाने फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के ‘तड़प तड़प’ से ही दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लेने वाले के के को पता भी नहीं था कि ये गाना वह गा भी पाएंगे कि नहीं। इस्माइल दरबार को वह दिन कभी नहीं भूलता। बताते हैं, ‘के के उस दिन थोड़ा उलझा उलझा सा था। थोड़ा मायूस सा। शायद उसे इस गाने से मिल रही जिम्मेदारी का दबाव महसूस हो रहा था। पहले मैंने उसे गुदगुदाया और फिर महबूब (गीतकार) ने उससे थोड़ी मस्ती की। तब जाकर वह सामान्य हो पाया। उसे भरोसा था कि नहीं मुझे पता नहीं लेकिन हमने उसके जितने भी जिंगल सुने, उनसे हमें पता था कि ये गाना के के बहुत शानदार गाएगा। और, उसने गाया भी।’
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गायक केके
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पौने चार हजार जिंगल्स
जिंगल्स के के की पहली पहचान बने और पहली कमाई भी। सैंटोजन शूटिंग के पहले विज्ञापन में गाने के बाद के के ने कोई पौने चार हजार जिंगल्स गा डाले। लेकिन, फिल्मों के गानों के पीछे के के ने कभी रेस नहीं लगाई। गाने वही गाए जो उन तक चलकर आए। कभी पूछो तो कहते भी, ‘मैं उतने ही गानों के लिए हां कहता हूं जितने गा सकता हूं। महीने भर में एक अच्छा गाना भी गा लिया तो बहुत है। लोग मेरे पास आते हैं सुपर सितारों के नाम लेकर। लेकिन मैं तो कभी किसी सितारे को जेहन में रखकर गाता ही नहीं हूं।’ फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के अलावा के के ने शाहरुख खान के हिट गानों में शुमार ‘आखों में तेरी अजब सी अजब सी’ भी गाया है। ‘बजरंगी भाईजान’ का गाना ‘तू जो मिला’ सुनना अपने आप में एक अलग एहसास है और फिल्म ‘गैंग्स्टर’ का ‘तू ही मेरी शब है..’ का सूफियाना अंदाज...उफ्फ़!
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केके
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52 साल की दोस्ती फना
के के लिए संगीत किसी पूजा की तरह ही रहा। वह संगीत में शोर नहीं सुकून तलाशते थे। पिता से उन्हें बहुत लगाव रहा। जब से वह गुजरे के के अपने ही भीतर कहीं सिमटते चले गए। मंचों पर वह अपने भीतर का सारा दर्द, सारी संजोई हुई शांति उड़ेल देते थे। और, इस बार कोलकाता के मंच पर के के ने जीवन ही उड़ेल दिया। 53 साल के के का ये मंच 52 साल से दोस्त रहा, बस इस मंगलवार को वह बेवफा हो गया।