दक्षिण भारत में सावित्री सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक रही हैं। लोग न सिर्फ उनकी अदाकारी के कायल हैं बल्कि तमिल और तेलुगू फिल्मों की अन्य अभिनेत्रियों से उन्हें वे अलग मानते हैं। 40 के दशक के अंतिम सालों में जब उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, तो उनके बारे कहा गया था कि उन्हें एक्टिंग नहीं आती है। लेकिन 50 की दशक के दस्तक के साथ ही वो इंडस्ट्री की बेहतरीन अदाकारा बन गईं और उनका जादू आज भी सिनेमा प्रेमियों, खासकर तमिल और तेलुगू फिल्में देखने वालों पर चलता है। 6 दिसंबर को सावित्री की वर्षगांठ है। सावित्री अगर जिंदा होती तो 83 साल की होतीं।
पत्नी की शोहरत से चिढ़ने लगा था ये स्टार, नशा-अकेलापन और प्यार की तड़प ने ले ली सावित्री की जान
सावित्री का जादू ही था कि जब उनकी ज़िंदगी पर बनी फिल्म 'महानती' रिलीज़ हुई, तो फ़िल्म को देखने वे लोग भी पहुंचे, जिन्होंने कभी सिनेमाघरों में कदम नहीं रखा था। खासकर उस तबके की भीड़ दिखी जो सावित्री को देखकर जवान हुए थे। सिनेमाघरों के बाहर व्हील चेयर पर बुजुर्गों के चेहरे पर चमक दिख रही थी। ये सावित्री का जादू ही था जो उन्हें सिनेमाघरों में खींच लाया था। तेलुगू दर्शक भी मानते हैं कि सावित्री के सामने कोई और अभिनेत्री नहीं टिक सकती।
बचपन में अपने पिता को खोने के बाद सावित्री अपने नाना की देख-रेख में बड़ी हुईं। यह आश्चर्य की बात है कि बिना किसी ट्रेनिंग के वो बेहतरीन डांस करती थी और फिल्म में काम करने मद्रास चली आईं। 14 साल की उम्र में वो पहली बार मद्रास के जेमिनी स्टूडियों पहुंची थी। वहां उनकी फोटोग्राफी जेमिनी गणेशन ने की थी काफी समय बाद उनकी तस्वीरों की वजह से उन्हें फिल्म में काम करने का न्यौता मिला। हड़बड़ी में उन्होंने वो मौका खो दिया। निर्देशक ने कहा था, "वो फिल्म के फिट नहीं हैं।"
सावित्री की आदत थी कि वो चीजों को चुनौती की तरह लेती थी और उसके बाद वो ऐसी एक्टिंग करती थी जो उनके आलोचकों को सोचने पर मजबूर कर देता था उन दिनों विजया फिल्म्स का सिक्का चलता था। जो भी उसकी फिल्मों में काम करते थे वो स्टार माने जाते थे। सावित्री ने बैनर तले बनने वाली फिल्मों पर राज करना शुरू कर दिया। उन्हें पहली बार लीड रोल मिला देवदास में। इसमें उन्होंने पार्वती की भूमिका निभाई थी। इससे पहली की दो फिल्मों में उन्हें साइड रोल मिला था। इस फिल्म ने जबरदस्त सफलता हासिल की। भारत में देवदास कई भाषाओं में बनी पर तेलुगू जैसी सफलता शायद ही किसी को मिली। सावित्री ने इस फिल्म से लोगों के दिलों में अमिट जगह बनाई।
इस बीच उनके और जेमिनी गणेशन की नजदीकियां बढ़ी। गणेशन पहले से शादी-शुदा थे, लेकिन वो उनसे शादी करना चाहती थीं। काफी मशक्कतों के बाद वो ऐसा करने में कामयाब रहीं पर इस राज पर कितने दिनों तक पर्दा रहा? जैसे ही राज से पर्दा हटा, उन्होंने अपने प्यार जेमिनी गणेशन के लिए अपनी मां, चाचा और चाची को छोड़ दिया। यह प्यार के लिए उनकी कुर्बानी थी। शादी के बाद उन्होंने माया बाजार में काम किया। इस फिल्म ने उनकी शोहरत में चार चांद लगा दिए।अब तक वो तेलुगू दर्शकों के दिलों में ही नहीं, दिमाग में भी जगह बना चुकी थी। तेलुगू फिल्मों में अब उन्हें रोकना आसान नहीं था।