दिवंगत शायर-गीतकार साहिर लुधियानवी की आज 42वीं पुण्यतिथि है। 25 अक्तूबर 1980 को साहिर इस दुनिया को अलविदा कह गए। मगर, उनकी शायरी और गीत आज भी लोगों के बीच उसी उत्साह से सुने जाते हैं। उनकी शायरियों में अधूरी मोहब्बत का दर्द है तो जिंदगी को जीने का जज्बा भी। उन्होंने अपने गीत और शायरियों के माध्यम से जुल्मों और गैर-बराबरी के खिलाफ भी खूब आवाज बुलंद की। साहिर लुधियानवी शब्दों के सच्चे जादूगर थे। साहिर लुधियानवी ने इश्क पर खूब लिखा। अमृता प्रीतम से उनके प्यार के किस्से आज भी खूब दिलचस्पी से सुने जाते हैं। मगर, साहिर ताउम्र तन्हा रहे। आइए जानते हैं उनके बारे में...
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साहिर लुधियानवी
- फोटो : सोशल मीडिया
साहिर लुधियानवी का जन्म 8 मार्च 1921 में लुधियाना के एक जागीरदार घराने में हुआ। उनके पिता बेहद अमीर थे, लेकिन मां-पिता के अलगाव के बाद उन्होंने मां के साथ गरीबी में रहना पसंद किया। लुधियाना के खालसा हाई स्कूल में साहिर ने पढ़ाई की। 1939 में कॉलेज के दिनों में वह अमृता प्रीतम से प्यार कर बैठे, लेकिन अमृता के घरवालों को यह पसंद नहीं आया, क्योंकि एक तो साहिर मुस्लिम थे और दूसरे गरीब। बाद में अमृता के पिता के कहने पर उन्हें कालेज से निकाल दिया गया। अमृता प्रीतम और साहिर लुधियानवी के प्यार के किस्से आज भी मशहूर हैं। हालांकि, दोनों का प्यार मुकम्मल नहीं हो पाया।
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साहिर लुधियानवी
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रिपोर्ट्स के मुताबिक जीविका चलाने के लिए साहिर ने तरह-तरह की छोटी-मोटी नौकरियां कीं। 1943 में साहिर लाहौर आ गए और उसी वर्ष उन्होंने अपनी पहली कविता संग्रह 'तल्खियां' छपवायी। उन्हें शोहरत मिलनी शुरू हो गई। वर्ष 1945 में वे प्रसिद्ध उर्दू पत्र अदब-ए-लतीफ और शाहकार (लाहौर) के संपादक बने। बाद में वे एक पत्रिका सवेरा के भी सम्पादक बने और इस पत्रिका में उनकी किसी रचना को सरकार के विरुद्ध समझे जाने के कारण पाकिस्तान सरकार ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया।
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साहिर लुधियानवी
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लाहौर के बाद साहिर कुछ समय दिल्ली रहे। उसके बाद मुंबई आ गए। फिल्म 'आजादी की राह' पर (1949) के लिए उन्होंने पहली बार गीत लिखे। फिल्म 'नौजवान' का गाना ठंडी हवायें लहरा के आयें ..... बहुत लोकप्रिय हुआ। बाद में साहिर लुधियानवी ने 'बाजी', 'प्यासा', 'फिर सुबह होगी', 'कभी कभी' जैसी लोकप्रिय फिल्मों के लिए गाने लिखे। सचिनदेव बर्मन के अलावा एन. दत्ता, शंकर जयकिशन, खय्याम आदि संगीतकारों ने उनके गीतों की धुनें बनाई हैं। साहिर ने फिल्मों के लिए भी जो गाने लिखे, उनमें उनका खुद का व्यक्तित्व भी झलकता है। साहिर ऐसे पहले गीतकार थे, जिन्हें अपने गानों के लिए रॉयल्टी मिलती थी। उनके प्रयास के बावजूद ही संभव हो पाया कि आकाशवाणी पर गानों के प्रसारण के समय गायक तथा संगीतकार के अतिरिक्त गीतकारों का भी उल्लेख किया जाता था। इससे पहले तक सिर्फ गायक-संगीतकार का नाम ही होता था।
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