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ऋतिक पर भारी पड़े अक्षय, 'रुस्तम' ने पहले दिन किया 15 करोड़ रुपये का कारोबार
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 13 Aug 2016 01:54 PM IST
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रुस्तम में अक्षय कुमार और एलियाना डिक्रूज
बॉलीवुड के दो बड़े स्टार अक्षय कुमार और ऋतिक रोशन की फिल्मों ने एक ही दिन पर स्क्रीन पर अपनी शुरुआत की। हालांकि रुस्तम का परफॉरमेंस मोहेंजो दारो से बेहतर रहा। सूत्रों के मुताबिक अक्षय कुमार की रुस्तम ऋतिक रोशन की मोहेंजो दारो पर भारी पड़ रही है। रुस्तम का पहले दिन का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा। रुस्तम ने पहले दिन 15 करोड़ रुपये का कारोबार किया है जबकि मोहेंजो दारो का कारोबार 10 करोड़ रुपये का ही रहा।
आपको बता दें कि मोहेंजो दारो पिछले 2 साल में ऋतिक रोशन की पहली फिल्म है जबिक अक्षय कुमार 2016 में ही एयरलिफ्ट और हाउसफुल 3 फिल्मों के जरिए 100 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं।
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आपको बता दें कि मोहेंजो दारो पिछले 2 साल में ऋतिक रोशन की पहली फिल्म है जबिक अक्षय कुमार 2016 में ही एयरलिफ्ट और हाउसफुल 3 फिल्मों के जरिए 100 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुके हैं।
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पहले दिन रुस्तम का बेहतरीन परफॉरमेंस
रुस्तम
थोड़ी-सी बेवफाई और थोड़ी-सी देशभक्ति, दोनों को मिला कर जो एंटरटेनमेंट बना है, उसी का नाम रुस्तम है। 1959 के चर्चित नानावटी कांड पर आधारित यह कहानी कहने को सच्ची है, मगर अंदाज-ए-बयां फिल्मी है। आप अक्षय कुमार को गंभीर, देशभक्त और वर्दी वाले रोल देखने के इच्छुक हैं तो फिल्म आपके लिए है।
एक्शन का अभाव जरूर थोड़ा खटकेगा लेकिन अदालत में रचे कुछ चुटीले दृश्य मनोरंजन की भरपाई कर देंगे। फिल्म इस इमोशनल सूत्र को पकड़ कर चलती है कि जब वर्दी वाला नायक देश की रक्षा के लिए जल-थल या आकाश की सीमा पर तैनात है तो उसकी पत्नी को बरगलाना, गलत राह धकेलना अपराध है। नायक कहता है कि इसके लिए मौत की सजा जायज है।
एक्शन का अभाव जरूर थोड़ा खटकेगा लेकिन अदालत में रचे कुछ चुटीले दृश्य मनोरंजन की भरपाई कर देंगे। फिल्म इस इमोशनल सूत्र को पकड़ कर चलती है कि जब वर्दी वाला नायक देश की रक्षा के लिए जल-थल या आकाश की सीमा पर तैनात है तो उसकी पत्नी को बरगलाना, गलत राह धकेलना अपराध है। नायक कहता है कि इसके लिए मौत की सजा जायज है।
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मोहेंजो दारो की धीमी शुरुआत
मोहेंजो दारो
मोहेंजो दारो के रूप में फिर ऐसा उदाहरण हमारे सामने है जो बताता है कि फिल्म सिर्फ पैसों से नहीं बनती। अकूत धन, उच्च तकनीक, मंजे हुए अभिनेता हों मगर कथा/पटकथा लचर रहे तो कुल जमा पानी फिर जाता है। आशुतोष गोवारिकर ने फिल्म के निर्देशन के साथ लेखन विभाग भी संभाला लेकिन नाकाम रहे। इतिहास, प्रेम कहानी या नदी पर बांध बनाने से उपजने वाले संकट!
वह सिंधु घाटी सभ्यता काल, उसके विकसित शहर मोहेंजो दारो में होने वाले करोबार को फिल्म में कला निर्देशकों की मदद से तो दिखा सके परंतु कहानी में उनका महत्व स्थापित करने तथा नायक-नायिका की प्रेम कथा में संतुलन नहीं बैठा सके। फिल्म थोड़ी-बहुत उन्हें ठीक लग सकती है जिनकी दिलचस्पी इतिहास दर्शन में है परंतु जो मनोरंजन की तलाश में जाएंगे वह निराश होंगे।
वह सिंधु घाटी सभ्यता काल, उसके विकसित शहर मोहेंजो दारो में होने वाले करोबार को फिल्म में कला निर्देशकों की मदद से तो दिखा सके परंतु कहानी में उनका महत्व स्थापित करने तथा नायक-नायिका की प्रेम कथा में संतुलन नहीं बैठा सके। फिल्म थोड़ी-बहुत उन्हें ठीक लग सकती है जिनकी दिलचस्पी इतिहास दर्शन में है परंतु जो मनोरंजन की तलाश में जाएंगे वह निराश होंगे।