फिल्म 'जयेशभाई जोरदार' में रणवीर सिंह एक बेटी के पिता बने हैं जो पत्नी के गर्भ में पल रही दूसरी बेटी को बचाने के लिए परिवार से बगावत कर देता है। लीक से हटकर किरदार करते रहने को ही अपनी पहचान बना चुके रणवीर सिंह से उनके अब तक के सफर और आने वाली फिल्मों पर एक खास बातचीत।
Ranveer Singh Interview: मुझे चार्ली चैपलिन से मिली जयेशभाई जोरदार का किरदार करने की प्रेरणा: रणवीर सिंह
आप अपनी मां और पत्नी की खूब तारीफें करते रहते हैं। और ऐसी कौन सी महिलाएं हैं जिन्होंने आपकी प्रभावित किया है?
मेरी नानी। और मेरी बहन जो मुझसे दो साल बड़ी हैं। मेरी बड़ी बहन मेरी दूसरी मां की ही तरह हैं। बचपन से लेकर आज तक उनका साथ रहा है। उनकी एनर्जी हमेशा मेरे आस पास रही है। मेरी टीम में भी बहुत सारी महिलाएं हैं। उनकी वजह से जो मैं करना चाह रहा था कर पा रहा हूं। जिनकी वजह से मैं आज यहां तक पहुंचा हूं उन सब महिलाओं का सम्मान मैं अपनी नई फिल्म ‘जयेशभाई जोरदार’ से कर पाया हूं।
विज्ञापनों के आंकड़ों के हिसाब से आप हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े ब्रांड हैं। इसका श्रेय आप किसे देते हैं?
मेरी तो शुरुआत ही विज्ञापन फिल्मों से हुई है। अदाकारी से पहले मैं कॉपी राइटर ही हुआ करता था। आज भी विज्ञापनों को ही मैं पहली प्राथमिकता देता हूं। मैंने बहुत सारे कलाकरों को देखा है जो विज्ञापनों में सौ फीसदी मेहनत नहीं करते। वह विज्ञापन को बस विज्ञापन की तरह देखते हैं। लेकिन, मेरे लिए विज्ञापन 15 सेकंड की एक फिल्म होती है जिसे पूरी दुनिया देखती है। चाहे फिल्में हों या विज्ञापन फिल्में, मुझे कोई काम आधे मन से करना आता ही नहीं है।
और, बॉक्स ऑफिस के आंकड़े?
मेरे लिए ये बहुत मायने रखते हैं। अगर आपकी फिल्में चलेंगी तो ही आपको फिल्म मिलेगी और विज्ञापन फिल्में मिलेंगी। शुक्र है कि मेरी फिल्में चल रही हैं। तमाम सारे विज्ञापन आ रहे हैं। फिर सवाल यह उठता है कि जो विज्ञापन फिल्मों में काम करने के मौके मेरे पास आए उनका मैंने किया क्या? जवाब ये है कि उसमें अपना योगदान देकर मैंने ये सारे विज्ञापन अपने हिसाब से खुद डिजाइन किए हैं। अब तो मैं इतने सारे विज्ञापन कर चुका हूं कि मेरे हिसाब से लोग मुझे इन विज्ञापन फिल्मों की वजह से ही पसंद करते हैं।
दक्षिण भारतीय फिल्में बनाम हिंदी फिल्मों पर चर्चा के बीच आप भी निर्देशक शंकर की फिल्म ‘अन्नियन’ का रीमेक कर रहे हैं, क्या भविष्य है इन रीमेक फिल्मों का?
हां, मैं निर्देशक शंकर की फिल्म 'अन्नियन' की रीमेक कर रहा हूं। निश्चित रूप से इस फिल्म को लेकर मैं बहुत ही उत्साहित हूं। रीमेक का भविष्य तो ये है कि रीमेक फिल्में तब बनती हैं, जब मूल फिल्में सफल होती हैं। अब तो दक्षिण की फिल्में डब होकर मूल फिल्म के साथ ही हिंदी में रिलीज होने लगी है। तो देखना होगा कि रीमेक कोई बनाएगा या नहीं। अब अखिल भारतीय फिल्मों का नहीं बल्कि विश्वस्तरीय फिल्मों का जमाना है। मैं मानता हूं कि भाषा की अब भी अपनी सीमाएं है लेकिन आज लोग सब जगह की फिल्में देख रहे हैं तो ये बदलाव तो आया है।