निर्माता करण जौहर की निर्माणाधीन फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' का मेकिंग बजट मंजूर करने वाले अधिकारियों ने अब डिजनी इंडिया के भीतर इस फिल्म को सिनेमाघरों में ही रिलीज करने का माहौल बनाना शुरू कर दिया है। यही नहीं कंपनी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अपना नोटिस पीरियड पूरा कर रहे इसके शीर्षस्थ अधिकारी उदय शंकर ने भी फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' को सिर्फ सिनेमाघरों में ही अनुभव किए जा सकने लायक सिनेमा बता दिया है।
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ब्रह्मास्त्र
- फोटो : Instagram-@aliaabhatt
अयान मुखर्जी के निर्देशन में बन रही सुपरहीरो ड्रामा फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' को लेकर बीते कुछ दिनों से डिजनी इंडिया के भीतर उठापटक की खबरें आती रही हैं। एक तो इस फिल्म के लिए इतना भारी भरकम बजट कैसे पारित हुआ, इसी पर बातें हो रही हैं। दूसरी चर्चा ये चल रही है कि क्या इस फिल्म को ओटीटी पर रिलीज कर दिया जाए। कंपनी इस बारे में आधिकारिक तौर पर तो कुछ भी नहीं कह रही है, लेकिन कंपनी का एक धड़ा फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' से जल्द से जल्द मुक्ति का पक्षधर है।
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स्टार और डिज्नी इंडिया के अध्यक्ष उदय शंकर ने एक सम्मेलन के दौरान जब कहा कि 'ब्रह्मास्त्र' जैसी फिल्मों का बेहतरीन अनुभव सिर्फ सिनेमाघरों में ही हो सकता है और बेहतर होगा कि इसे वहीं रिलीज किया जाए, तो ये मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है। ट्रेड में चर्चा शुरू हो गई है कि उदय शंकर का ये बयान फिल्म के सह निर्माता करण जौहर के बचाव में आया है। करण जौहर ने भी फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' को ओटीटी पर रिलीज किए जाने के कथित प्रस्ताव को अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया था।
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करण जौहर
- फोटो : instagram/karanjohar
फॉक्स स्टार स्टूडियोज और धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' को बनाने की घोषणा वर्ष 2018 में की गई थी। तब से यह फिल्म अपने भारी बजट के लिए चर्चाओं में है। फिल्म रिलीज के समय से पीछे चल रही है और अब तक इसकी रिलीज को लेकर कोई कुछ भी ठोस बात नहीं कर रहा है। फिल्म के बजट को लेकर भी तमाम तरह के आंकड़े सामने आते रहे हैं।
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उदय शंकर
- फोटो : Twitter: @campaign_india
फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' के बजट के बारे में उदय शंकर ने कहा कि अब तक इतने बड़े बजट की फिल्म देश में बनाई नहीं गई। सटीक संख्या तो नहीं है लेकिन इतना जरूर है कि इस फिल्म का बजट तीन सौ करोड़ रुपये के आसपास ही होगा। फिल्म की रिलीज पर उनका कहना रहा कि 'ब्रह्मास्त्र' जैसी जिस अनुभव के साथ बनाई गई है, उसी अनुभव को अगर दर्शकों के बीच भी पैदा किया जाए तो ज्यादा बेहतर है। इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता है इस तरह की फिल्मों का असली मजा सिर्फ सिनेमाघरों में ही लिया जा सकता है।