बॉलीवुड अभिनेता राजीव कपूर का जन्मदिन 25 अगस्त को होता है। इस साल उनके निधन के बाद ये उनकी पहली जन्मतिथि है। मालूम हो कि राजीव कपूर, राज कपूर और कृष्णा कपूर के सबसे छोटे बेटे थे। ऋषि कपूर और रणधीर कपूर उनसे बड़े थे। राजीव कपूर की पहचान राज कपूर ने अपनी फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से बनाई थी। हालांकि, बहुत कम लोग ही यह बात जानते हैं कि राजीव कपूर की अपने पिता राज कपूर से नहीं बनती थी। आइए जानते हैं कि आखिर बाप-बेटे के बीच ऐसी अनबन कैसे हो गई। राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ था। राजीव ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत फिल्म 'एक जान हैं हम' से की थी। राम तेरी गंगा मैली फिल्म में राजीव कपूर ने रोल निभाया था। उनको सबसे ज्यादा पहचान इसी फिल्म से मिली। लेकिन कहते हैं कि यही फिल्म कपूर खानदान में कलह का कारण भी बनी।
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राजीव कपूर
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, साल 1985 में राज कपूर ने फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' बनाई थी। फिल्म सुपरहिट साबित हुई लेकिन इससे राजीव कपूर को कोई फायदा नहीं मिला। यह फिल्म केवल राज कपूर के डायरेक्शन और इसकी हिरोइन मंदाकिनी के लिए जानी जाती है। फिल्म में मंदाकिनी का रोल इतना मजबूत था कि राजीव फिल्म में खो से गए।
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'राम तेरी गंगा मैली' में राजीव कपूर और मंदाकिनी
राजीव कपूर का मानना था इसके लिए राज कपूर जिम्मेदार हैं। दरअसल राजीव कपूर चाहते थे कि राज कपूर 'राम तेरी गंगा मैली' के बाद उनके लिए एक और फिल्म बनाएं। वो उन्हें उस फिल्म में एक नायक की तरह प्रोजेक्ट करें ताकि स्टार होने का जो फायदा मंदाकिनी को मिला था वो अब उन्हें इस फिल्म में मिले।
लेखिका मधु जैन की किताब 'द कपूर्स' में उन्होंने कपूर फैमिली की अंदर की बात को उजागर करते हुए लिखा है, 'राजीव कपूर फिल्म में उनका किरदार कमजोर किए जाने के लिए अपने पिता और डायरेक्टर राज कपूर को जिम्मेदार मानते थे। 'राम तेरी गंगा मैली' के हिट होने से मंदाकिनी तो रातोंरात स्टार बन गईं लेकिन राजीव कपूर को को इसका कोई फायदा नहीं हुआ। कहते हैं कि राज कपूर ने राजीव के लिए और कोई फिल्म बनाने से इनकार कर दिया।
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राजीव कपूर और मंदाकिनी
- फोटो : @mandakiniofficial
राजीव कपूर के चाहने के बावजूद राज कपूर ने ऐसा नहीं किया और राजीव को राज कपूर ने एक असिस्टेंट के तौर पर रखा। वो उनसे यूनिट का वह सारा काम कराते जो एक स्पॉटब्वॉय और असिस्टेंट करता था। 'राम तेरी गंगा मैली' के बाद राजीव कपूर 'लवर ब्वॉय', 'अंगारे', 'जलजला', 'शुक्रिया', 'हम तो चले परदेस' जैसी फिल्मों में दिखे तो पर उनकी फिल्में चली नहीं। ये फिल्में आरके बैनर की नहीं थीं। कहा जाता है कि पिता के व्यवहार से राजीव इतने आहत हो गए थे कि जब राज कपूर का निधन हुआ तो राजीव कपूर उनके अंतिम संस्कार तक में नहीं गए थे।