संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' का केस लड़ रहे सीनियर वकील हरीश साल्वे को जान से मारने की धमकी मिली है। फिल्म का विरोध कर रहे राजपूत संगठन की ओर से हरीश साल्वे के ऑफिस में धमकी भरा कॉल किया गया। मीडिया से बात करते हुए हरीश साल्वे ने बताया कि फिल्म रिलीज होने पर मुझे शारीरिक रूप से क्षति पहुंचाने की धमकी दी गई है।
जिसके बाद करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कल्वी ने इस पर सफाई दी है। कल्वी के मुताबिक हर चीज के लिए करणी सेना को जिम्मेदार ठहराना गलत है। फिल्म पद्मावत पर राज्य सरकार और फिल्म के निर्माता आमने सामने हैं। सुप्रीम कोर्ट में निर्माताओं की ओर से हरीश साल्वे के साथ जाने माने वकील मुकुल रोहतगी ये केस लड़ रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा फिल्म पर बैन लगाए जाने के खिलाफ कोर्ट में साल्वे ने कई तर्क पेश किए। दोनों सीनियर्स वकीलों के मुताबिक राज्य सरकार के पास ऐसी कोई शक्ति या अधिकारी नहीं इस तरह किसी भी फिल्म के प्रसारण पर रोक लगा दे, जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म पास कर दी हो।
राज्यों की तरफ से पेश हुए ASG तुषार मेहता ने दलील दी कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। इस पर हरीश साल्वे ने फिल्म में दिखाए जाने वाले डिस्क्लेमर को कोर्ट के सामने पढ़कर सुनाया, जिसमें कहा गया है 'यह एक काल्पनिक कहानी पर आधारित है', इतिहास से इसका कोई लेना देना नहीं। साल्वे ने तो कोर्ट में यहां तक कहा 'एक दिन मैं चाहूंगा कि मैं इस बात पर दलील दूं कि कलाकारों को इतिहास से छेड़छाड़ का अधिकार भी होना चाहिए।' इस पर तुषार मेहता ने कहा 'ऐसा नहीं हो सकता। आप महात्मा गांधी को विस्की पीते नहीं दिखा सकते।' इस पर साल्वे ने कहा, 'लेकिन यह इतिहास से छेड़छाड़ नहीं होगी।' इस पर कोर्ट में मौजूद सभी लोग हंस पड़े।
22 जून 1955 को महाराष्ट्र में जन्मे साल्वे मूलरूप से नागपुर के रहने वाले हैं। हरीश साल्वे की गिनती देश के जाने-माने एडवोकेट्स में होती हैं। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर रह चुके हैं। साल 2015 में बॉलीवुड स्टार सलमान खान को सजा होने के कुछ घंटे बाद ही साल्वे ने अपने तर्क से उन्हें बेल दिला दी थी। नागपुर में जन्मे इस वकील ने महज एक रुपये की फीस लेकर कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारत का पक्ष रखा था। अंतिम सुनवाई तक उन्हें दिए गए मृत्युदंड पर रोक लगा दी गई।