साल 2004 की बात है। मशहूर स्पोर्ट्सवियर कंपनी के एक विज्ञापन ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। इस विज्ञापन में फुटबॉल के चर्चित खिलाड़ी डेविड बेखम और बॉक्सर मोहम्मद अली के साथ एक बुजुर्ग सरदार भी दिखे। पूरी दुनिया ये पता लगाने में जुट गई कि आखिर ये बुजुर्ग सरदार हैं कौन? यह वह शख्सीयत हैं जिन्होंने धावक के तौर पर अपना करियर ही 89 साल की उम्र में शुरू किया।
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फौजा सिंह
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जिस उम्र में लोग जीवन के चौथेपन में अपनी शारीरिक व्याधियों से दुखी होकर दिन रात अपने बुढ़ापे को कोसते रहते हैं। पंजाब में 1911 में जन्मे एक सिख ने लंदन में बसने का फैसला करके एक नई जिंदगी शुरू की। पारिवारिक त्रासदियों से दुखी यह शख्स पहले दिन ट्रैक पर पहुंचा तो थ्री पीस सूट पहने हुए था। कोच ने इसे ऊपर से नीचे तक देखा और देर तक बात करने के बाद उसे भी लगा कि इसके इरादे डिगने वाले नहीं हैं।
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फौजा सिंह
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
साल 2000 की लंदन मैराथन में सारे कैमरे एक ही शख्स पर टिके हुए थे। 93 साल की उम्र में इस धावक ने अपनी पहली मैराथन पूरी की। समय लगा छह घंटे 54 मिनट। ये 90 साल की उम्र से ऊपर के किसी धावक के पहले बनाए गए वर्ल्ड रिकॉर्ड से 58 मिनट बेहतर था। यहीं एडिडास कंपनी की नजर उस शख्स पर पड़ी जिसे दुनिया ने फौजा सिंह के नाम से जाना। फौजा सिंह ने बतौर धावक अपने करियर में एक से एक बेहतरीन रिकॉर्ड बनाए हैं। हालांकि, गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उनका जन्म प्रमाण पत्र न होने पर उनके रिकॉर्ड को दर्ज करने से मना कर दिया था।
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फौजा सिंह
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फौजा सिंह को अपनी जन्म तिथि साबित करने के लिए तमाम मशक्कतें करनी पड़ीं। संयोग से उन्हें अपना वह पासपोर्ट मिल गया जिस पर उनकी जन्मतिथि 1 अप्रैल 1911 अंकित थी। यहीं से उनका समय बदलना शुरू हुआ और क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने 2011 में उनके सौ साल पूरे होने पर पत्र लिखकर बधाई दी। 102 साल के होने पर फौजा सिंह ने अपनी आखिरी मैराथन दौड़ हॉन्गकॉन्ग में पूरी की। 2015 में उन्हें ब्रिटिश एंपायर मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
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फौजा सिंह
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इन्हीं फौजा सिंह की कहानी अब पर्दे पर उतरने जा रही है। ‘मैरी कॉम’ और ‘सरबजीत’ जैसी चर्चित बायोपिक फिल्में बना चुके निर्देशक ओमंग कुमार अब फौजा सिंह के जीवन पर इसी नाम से एक फिल्म बनाने जा रहे हैं। फिल्म के निर्माण में उनके साथी बने हैं राज शांडिल्य और कुणाल शिवदासानी। दुनिया के सबसे बुजुर्ग मैराथन धावक की इस फिल्म के बारे में ओमंग कुमार कहते हैं, “फौजा सिंह की कहानी इच्छाशक्ति के बूते हर बाधा को पार करने की कहानी है।”