रामचरित मानस में तुलसीदास कहते हैं, ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।’ मतलब कि रामकथा का विस्तार इतना अनंत है कि इसका पार पाना मुश्किल है। हर कथावाचक इस कथा को जब भी सुनाने चलता है तो कुछ न कुछ नया ज्ञान या नई जानकारी का मोती इस अथाह सागर से ही खोज ही लाता है। शिवत्रयी और रामचंद्र श्रृंखला की पुस्तकें लिखकर दुनिया भर में चर्चित हो चुके लेखक अमीश त्रिपाठी अब एक नई रामकथा लेकर आ रहे हैं। ‘लेजेंड्स ऑफ रामायण’ नामक इस कथा में वह डिस्कवरी+ के साथ मिलकर कुछ ऐसे तथ्य रामभक्तों के सामने लाने वाले हैं, जिन्हें शायद ही आपने पहले कहीं देखा या सुना हो। इसमें से ही एक रोचक जानकारी भगवान श्रीराम की बहन के बारे में भी है।
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भगवान राम पर सीरीज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जानकारी के मुताबिक सीरीज ‘लेजेंड्स ऑफ रामायण’ में रामकथा सुनाते हुए अमीश त्रिपाठी ने उन अनोखे स्थानों का भी भ्रमण किया है जो रामकथा के अटूट हिस्से हैं। इन रास्तों से गुजरते हुए सीरीज बनाने वाली टीम ऐसे आदिवासियों से भी मिली जिनके यहां पूरे शरीर पर राम का नाम गुदवाने की परंपरा हजारों साल से चली आ रही है। रामेश्वर में पानी पर तैरने वाले पत्थरों की कथा तो सबको मालूम है लेकिन ये शायद ही कुछ लोगों को मालूम हो कि इन पत्थरों का प्रयोग बाद में वहा एक चर्च बनाने के लिए भी किया गया।
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लेजेंड्स ऑफ रामायण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस रामकथा का विस्तार जानने के लिए इसकी टीम ने देश में करीब पांच हजार किमी का भ्रमण किया है। इस यात्रा के दौरान तमाम इतिहासकारों, देवकथाओं के खोजकर्ताओं और पर्यावरणविदों से भी बात की गई। इस बातचीत के दौरान ऐसी ऐसी जानकारियां भी सामने आने का दावा किया है जिनके बारे में प्रभु श्री राम के अनन्य भक्तों को भी जानकारी कम ही है। इक्ष्वाकु वंश की तमाम कहानियां इस सीरीज मं पिरोई गई हैं। साथ ही इस कथा में अंक 11 की महत्ता का विस्तार है और गूढ़कथा उस संप्रदाय की भी है जो खुद को रामनामी कहता है।
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लेजेंड्स ऑफ रामायण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
डिस्कवरी+ पर इसी नवरात्रि के दौरान 7 अप्रैल से शुरू होने जा रही ये सीरीज तीन एपीसोड की है और इसके वाचक हैं अमीश त्रिपाठी। अपनी शिवत्रयी और रामचंद्र सीरीज की पुस्तकों से दुनिया भर में नाम कमाने वाले लेखक अमीश की बतौर उद्घोषक ये पहली कोशिश है। कैमरे के सामने डेब्यू करने जा रहे अमीश कहते हैं, ‘ऐसा कहा जाता है कि रामायण कोई भी पहली बार नहीं सुनता। हम इसी के साथ जन्म लेते हैं। ये हमारी संतति में शामिल है। ये हमारी अमर और अटूट परंपरा है और इस कथा को एक डॉक्यूमेंट्री की शक्ल में सुनाना मेरे लिए घर लौटने जैसा ही। हमने कथा सुनानी तो वही शुरू की थी जो सब जानते हैं, लेकिन इस यात्रा के दौरान हमारे सामने ऐसी जानकारियां भी आईं, जिनकी हमें कभी उम्मीद ही नहीं थी।’