हिंदी सिनेमा का जब भी जिक्र होगा फिल्म मुगल-ए-आजम की चर्चा जरूर होगी। निर्माता और निर्देशक के. आसिफ जब फिल्म बना रहे होंगे तब उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि वो इतिहास बनाने जा रहे हैं। हालांकि उस दौर में लोग के. आसिफ को एक पागल निर्देशक कहते थे। काम के प्रति उनका जुनून और लगन ऐसी थी कि दूसरे उन्हें सनकी कहकर बुलाते थे। के. आसिफ का जन्म 14 जून 1922 को इटावा में हुआ था। चलिए इस मौके पर उनके बारे में कुछ खास बातें बताते हैं।
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मुगल-ए-आजम
- फोटो : सोशल मीडिया
मुगल-ए-आजम को बनाने के दौरान के. आसिफ को बहुत सी रुकावटों का सामना करना पड़ा। इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि लगातार 14 सालों तक फिल्म का निर्माण चलता रहा। यह फिल्म पूरे हिंदुस्तान में ही नहीं पाकिस्तान, इटली, जापान, अमेरिका, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया में भी अलग-अलग भाषाओं में रिलीज हुई। करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म ने कुछ सालों बाद ही करोड़ों रुपये कमा लिए थे।
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मुगल ए आजम
- फोटो : सोशल मीडिया
रिपोर्ट्स के मुताबिक चौदह सालों में 1.5 करोड़ की लागत से बनी फिल्म मुगल-ए-आजम के एक गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’ को फिल्माने में 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे। जबकि उस दौर में पूरी फिल्म पांच से 10 लाख में बन जाया करती थी। फिल्म के लिए उन्होंने विदेश से हाथी, घोड़े मंगवाए। यही नहीं सोने की कृष्ण की मूर्ति को सेट पर भारी सुरक्षा के बीच में रखकर शूट किया गया था।
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मुगल-ए-आजम
- फोटो : सोशल मीडिया
एक फिल्मकार के तौर पर के. आसिफ में जबरदस्त आत्मविश्वास था। मुगल-ए-आजम की रिलीज के बाद दिलीप कुमार और मधुबाला फिल्म जगत के बड़े नाम बन गए। साल 2004 में यह फिल्म रंगीन होकर एक बार फिर बड़े पर्दे पर रिलीज हुई थी। जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया था।
के. आसिफ ने महज आठवीं तक पढ़ाई की थी। उनका बचपन बेहद गरीबी में गुजरा था। बड़े हुए तो फिल्मों की ओर रुचि जागी। फिर उन्होंने भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे बड़ी, भव्य और सफल फिल्म का निर्माण किया। नौ मार्च 1971 को दिल का दौरा पड़ने से के. आसिफ ने 48 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। के. आसिफ ने अपने जीवन में केवल दो फिल्में ही बनाई थीं।
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