'मैरी कॉम', 'बाजीराव मस्तानी' और 'पद्मावत' जैसी फिल्मों की सहायक निर्देशक शर्मिन सहगल की बतौर अभिनेत्री पहली फिल्म 'मलाल' इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है। संजय लीला भंसाली की भांजी के तौर पर पहचानी जाने वाली शर्मिन सहगल का इरादा अभिनय के अलावा आगे निर्देशन और फिल्म निर्माण में भी नाम कमाने का है।
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संजय लीला भंसाली के साथ मामा-भांजी का रिश्ता एक कलाकार और सर के स्तर तक कैसे पहुंचा?
मैं जब 11 साल की थी बस तब तक ही मैं एक भांजी थी। उस उम्र के बाद मैंने उनके काम को समझना शुरू किया और जाना कि हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी क्या जगह है। कभी कभी तो यह भी ख्याल आता है कि 'देवदास' जैसी फिल्म उन्होंने बनाई कैसे होगी। एक उम्र के बाद अब उनके लिए इज्जत अपने आप आती है। अब जब परिवार के साथ भी होती हूं, तब भी मैं उन्हें संजय सर ही कहती हूं।'
आपकी पहचान संजय लीला भंसाली की भांजी के तौर पर होती है तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
'मैं संजय लीला भंसाली की भांजी हूं और रहूंगी। मेरा नाम उनसे जुड़ा है, यह मैंने खुद नहीं चुना है। मेरा नाम शर्मिन है लोग तो यह नाम भी गलत तरह से बोलते हैं। पर एक अभिनेता के तौर पर मैं वह सब हूं जो दर्शक मेरे बारे में सोचते हैं। हर दर्शक की एक अलग सोच और नजरिया होता है, अगर वह मुझे इस फिल्म के बाद भी भांजी बुलाएं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।'
‘संजय सर’ के साथ अपने अब तक के अनुभव के बारे में हमारे पाठकों को बताएं?
'सबसे पहली फिल्म 'मैरीकॉम' थी फिर 'बाजीराव मस्तानी'। हर एक कलाकार का सपना होता है उनके साथ काम करने का, वैसा ही मेरा भी रहा है। लेकिन उस लायक बनने से पहले मुझे उस मुकाम तक पहुंचना जरूरी है। इसीलिए मैंने इन फिल्मों पर काम किया ताकि पहले मैं फिल्म मेकिंग सीख जाऊं। मैंने एक्टिंग स्कूल में भी वही सीखा जिसकी जरूरत थी। मैं उनके निर्देशन में काम करना चाहती हूं।'
वंशवाद के सवालों का सामना कैसे करती हैं?
'सिनेमा में वंशवाद है और इसे झुठलाया नहीं जा सकता। हर कलाकार यहां वंशवाद की वजह से ही नहीं काम कर रहा है। करियर के शुरूआती दौर में इससे भले मदद मिलती हो लेकिन आपका भविष्य आपकी मेहनत ही तय करती है न कि आप किस परिवार से हैं।'