भारतीय बॉलीवुड के सबसे खूबसूरत चेहरों की जब भी बात होती है तो लोग मधुबाला का नाम सबसे पहले लेते हैं। मधुबाला मोहक, खूबसूरत, दिलकश और ताजगी से भरपूर, जिसके चेहरे से नूर टपकता रहा हो, तो आप मधुबाला के अलावा शायद ही किसी दूसरे चेहरे के बारे में सोच पाएं। मधुबाला का जन्म 14 फरवरी 1933 को हुआ था। तो चलिए #ThrowBackThursday में आज आपको बताते हैं मधुबाला की जिंदगी के बारे में...
मधुबाला की खूबसूरती का अंदाजा लगाना हो तो 1990 में एक फिल्मी पत्रिका मूवी के बॉलीवुड की आल टाइम ग्रेटेस्ट अभिनेत्रियों की लोकप्रियता वाले सर्वेक्षण को देखिए, उसमें 58 फीसदी लोगों के वोट के साथ मधुबाला नंबर एक पर रहीं थीं। उनके आसपास कोई दूसरा नहीं पहुंच पाया था। मधुबाला एक ऐसी हीरोइन रहीं जिनके चर्चे बॉलीवुड ही नहीं बल्कि विदेशों और हॉलीवुड में भी फैले हुए थे। उनकी खूबसूरती और लोकप्रियता का आलम ये था कि ऑस्कर अवॉर्ड विनर निर्देशक फ्रैंक कापरा मधुबाला को हॉलीवुड में ब्रेक देने का मन भी बना चुके थे, लेकिन मधुबाला का मकसद हॉलीवुड नहीं था, वो तो बस बॉलीवुड में छा जाना चाहती थीं।
लेकिन वो कहते हैं ना कि किस्मत में जो लिखा है उसे कोई टाल नहीं सकता। मधुबाला के साथ भी यही हुआ। एक तरफ सफलता उनके कदम चूमने को तैयार थी तो वहीं दूसरी ओर गंभीर बीमारियां काल बनकर उनके साथ चल रही थीं। मधुबाला को इस काल का अहसास भी नहीं था। लेकिन एक दिन उस काल ने खुद ही मधुबाला के दर पर दस्तक दे दी और 36 साल की कम उम्र में ही मधुबाला इस दुनिया से चल बसीं।
मधुबाला को एक दो नहीं बल्कि कई गंभीर बीमारियां थीं, जिनके चलते ना सिर्फ मधुबाला का करियर खत्म हो गया बल्कि इसने उनकी जिंदगी को लील लिया। मधुबाला के ना सिर्फ दिल में छेद था बल्कि फेफड़ों में भी परेशानी थी। इसके अलावा उन्हें एक और गंभीर बीमारी थी जिसमें उनके शरीर में आवश्यक मात्रा से ज्यादा खून बनने लगता था और ये खून उनकी नाक और मुंह से बाहर आता था। ये खून तब तक निकलता रहता जब तक कि उसे शरीर से ना निकाल दिया जाए।
मधुबाला तड़पती रहतीं और असहाय दर्द कम होने का नाम ही नहीं लेता था। हालत इतनी खराब थी कि डॉक्टर रोज घर आते और मधुबाला के शरीर से कई बोतल खून निकालकर ले जाते ताकि खून निकलना बंद हो जाए। दिनोंदिन मधुबाला की हालत गिरती जा रही थी। हर वक्त वो खांसती रहतीं और बलगम निकलता रहता। एक वक्त ऐसा भी आया जब मधुबाला का सांस लेना दूभर हो गया और हर चार घंटे में उन्हें ऑक्सीजन देनी पड़ती थी। मधुबाला को उनकी बीमारियों ने इस कदर जकड़ लिया था कि नौ सालों तक वो बिस्तर पर ही पड़ी रहीं।