उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा और मध्य प्रदेश में भी सरकार ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कानून बनाने पर विचार कर रही है। इस मामले में स्वरा भास्कर, जीशान अयूब समेत कई सितारों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। बॉलीवुड की बात करें तो यहां हमेशा से ऐसी फिल्में बनती रही हैं जिनमें धर्म के दीवार को तोड़कर प्यार को बढ़ावा दिया गया है।
निर्देशक अभिषेक कपूर की फिल्म केदारनाथ में एक मुस्लिम कुली (सुशांत सिंह राजपूत) और एक हिंदू पर्यटक (सारा अली खान) के बीच प्रेम कहानी दिखाई गई है, जो केदारनाथ की धार्मिक यात्रा पर हैं। फिल्म को लेकर हिंदू संगठनों ने जमकर विरोध किया था। बॉक्स ऑफिस पर केदारनाथ ने ठीक ठाक कमाई की थी।
मणिरत्नम की फिल्म बॉम्बे (1995) में मुख्य किरदार अरविंद स्वामी और मनीषा कोइराला ने निभाए हैं। इसमें संगीत एआर रहमान ने दिया है। फिल्म की कहानी शेखर मिश्रा नारायण और शैला बानो के प्यार पर आधारित है जो शादी करना चाहते हैं। एकमात्र समस्या यह है कि शेखर हिंदू है और शैला मुस्लिम है।
फिल्म दहक (1999) में सोनाली बेंद्रे और अक्षय खन्ना ने मुख्य किरदार निभाया। फिल्म हिंदू-मुस्लिम के बीच प्रेम संबंधों को दिखाया गया है। फिल्म में सोनाली बेंद्रे का डबल रोल है। फिल्म में प्रेम कहानी के जरिए धर्मनिरपेक्षता के सही रूप को ढूंढ़ने की कोशिश की जाती है।
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माई नेम इज खान
- फोटो : फिल्म
करण जौहर की माई नेम इज खान (2010) मुंबई दंगों, 11 सितंबर 2001, अमेरिका पर हमलों और धार्मिक कट्टरता को दिखाता है। शाहरुख खान का नाम रिजवान खान है, जो मंदिरा (काजोल) को प्यार करता है। मंदिरा का बेटा एक नफरत भरे हमले में मारा जाता है। फिल्म की कहानी इसी के इर्द गिर्द घूमती है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी।