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Ravi Shankar: सितार 'सुरशंकर' के लिए प्लेन में अलग से सीट बुक कराते थे पंडित रविशंकर, जानिए जादूगर के बारे में

Fri, 07 Apr 2023 09:10 AM IST
प्रियंका नेगी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रियंका नेगी Updated Fri, 07 Apr 2023 09:10 AM IST
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legendary musician Pandit Ravi Shankar birthday know unknown facts about singer life and career
पंडित रविशंकर - फोटो : अमर उजाला

शास्त्रीय संगीत की बात की जाए और सितार वादक पंडित रवि शंकर का जिक्र वहां न हो ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता। विश्व संगीत का गॉडफादर कहलाने वाले पंडित रविशंकर को भला कौन नहीं जानता। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को पूरी दुनिया में अलग पहचान दिलाई। रविशंकर ने अपनी पूरी जिंदगी सितार के नाम कर दी थी और आखिरी वक्त में भी उन्होंने सितार को अपने से दूर नहीं होने दिया। तबीयत खराब होने के बाद भी उन्होंने स्टेज शो किया। वे अक्सर कहा करते थे कि सितार के साथ उनका निजी और आध्यात्मिक रिश्ता भी है।

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रविशंकर का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में साथ अप्रैल 1920 को हुआ था। वे सात भाइयों में सबसे छोटे थे। उन्हें बचपन से ही संगीत में रुचि थी। वे 10 साल की उम्र से ही अपने भाई के डांस ग्रुप का हिस्सा थे। शुरुआत में रविशंकर डांस को बेहद पसंद करते थे, लेकिन 18 साल की उम्र में उन्होंने सितार सीखना शुरू किया और इसके लिए मैहर के उस्ताद अलाउद्दीन खान से दीक्षा ली। पंडित रविशंकर को सदी के सबसे महान संगीतकारों में गिना जाता है। पश्चिम बंगाल में उनकी लोकप्रियता तो शानदार की थी। कहा जाता है कि रविशंकर के संगीत में आध्यात्मिक शांति छिपी थी।

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भले ही आज पंडित रविशंकर हमारे बीच न हों, लेकिन उनके सितारों के सुरों से आज भी आनंद की अनुभूति की जा सकती है। कहा जाता है बाकी पंडित रविशंकर अपने सितार से खूब प्यार करते थे। वे दुनिया में कहीं भी शो करने जाते तो प्लेन में उनके लिए दो सीटें बुक की जाती थीं, एक सीट पंडित रविशंकर के लिए और दूसरी उनके सितार सुरशंकर के लिए। संगीत के प्रति उनके प्यार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खराब स्वास्थ्य होने के बावजूद भी वे खुद को स्टेज पर आने से नहीं रोक पाए। रविशंकर ने अपना आखिरी परफॉर्म बेटी अनुष्का के साथ किया था, जो 4 दिसंबर 2012 में हुआ था। इससे पहले रविशंकर की तबियत इतनी खराब थी कि उन्हें ऑक्सीजन मास्क तक पहनना पड़ा था

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उन्हें भारत सरकार द्वारा 1999 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनकी खूबसूरत कला का हर कोई दिवाना था। इस कला के जरिए ही उन्होंने एशिया सहित पूरे विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई। देश-विदेश के तमाम पुरस्कारों के अलावा उन्हें तीन बार ग्रैमी पुरस्कार भी उन्होंने अपने नाम किए। 12 दिसंबर 2012 को अमेरिका के सैन डिएगो के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया था।


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