फिल्म ‘बार-बार देखो’ का पार्टी नंबर 'काला चश्मा' इन दिनों लोगों की जुबान से हट नहीं रहा है। फिल्म हिट हुई हो या ना हुई हो लेकिन ये गाना बंपर हिट हुआ है। 90 के दशक में लिखे गए इस गाने को लेकर अब विवाद छिड़ गया है। इस गाने के राइटर अमरीक सिंह शेरा हैं।
फिल्ममेकर ने काला चश्मा गाने को लेकर बोला झूठ, राइटर को दिए सिर्फ 11 हजार रुपए
शेरा पेशे से हेड कॉन्सटेबल हैं। वो जालंधर के पास तलवंडी चौधरीयान गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने यह गाना 1990 में लिखा था। शेरा बताते हैं कि जब वो 9वीं क्लास में थे तब उन्होंने ये गाना लिखा था और उनकी उम्र 15 साल थी।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, शेरा को इस बारे में बिलकुल नहीं पता था कि उनका गाना किसी बॉलीवुड फिल्म में लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दो महीने पहले उनके एक दोस्त ने कॉल कर बताया कि उसका गाना काला चश्मा टीवी पर आ रहा है।
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शेरा को ये सुनकर खुशी भी हुई और हैरानी भी। शेरा ने बताया कि चार महीने पहले जालंधर की एक कंपनी ने मुझसे संपर्क किया और मेरे गाने मांगे। कंपनी ने बताया कि मुंबई की एक सीमेंट कंपनी उनके गानों को अपने उद्धघाटन समारोह में बजाना चाहती है।
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कंपनी ने शेरा के साथ एक एग्रीमेंट कर लिया और उसे 11 हजार रुपए दे दिए। शेरा को उस सीमेंट कंपनी का नाम याद नहीं है। उनका कहना है कि मुझे किसी ने नहीं बताया कि मेरे गाने को बॉलीवुड फिल्म में शामिल किया जाएगा। शेरा का कहना है कि मुझे इस बात का दुख है कि गाने के लॉन्च के वक्त उन्हें बुलाया नहीं गया।
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