जॉनी वॉकर यानी बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी का जन्म भी मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था। इनके पिता एक मिल में काम करते थे। लेकिन मिल बंद होने की वजह से जमालुद्दीन का पूरा परिवार बंबई आ गया। जॉनी वॉकर के अंदर शुरू से सिनेमा का जुनून था और लोगों की नकल उतारने में माहिर थे, इसलिए बस में मिमिक्री से यात्रियों का मनोरंजन कर गुजारा करते थे।
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Johnny Walker
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उन्होंने अपने अभिनय से करोड़ों लोगों का दिल जीता। 'सीआईडी' फिल्म का गीत 'ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, जरा हटके जरा बचके ये है बॉम्बे मेरी जां', जॉनी वॉकर पर फिल्माया गया था। गाने में मुबंई में बसों की हालत को दिखाया गया था। कहते है फिल्मों में काम करने का सपना लेकर आए जॉनी वॉकर को अपने संघर्ष के दिनों में बस कंडक्टर की नौकरी तक करनी पड़ी थी। इसके लिए उन्हें हर महीने 26 रुपए मिलते थे।
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50, 60 और 70 के दशक में अधिकतर फिल्मों में जॉनी वॉकर को कास्ट करना मतलब फिल्म का हिट होना माना जाता था। कहा जाता है कि मेकर्स राइटर्स पर दबाव डालकर फिल्म में उनका रोल तैयार करवाते थे। क्योंकि जॉनी वॉकर का इतना नाम था कि फिल्म में उनका नाम देख ही दर्शक थियेटर पर टूट पड़ते थे।
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जमालुद्दीन काजी को जॉनी वॉकर बनाने वाले गुरु दत्त ही थे। एक इंटरव्यू में जॉनी वॉकर ने बताया था, ‘जब मैं डायलॉग्स बोलता था तो गुरुदत्त लाइट बॉय, असिस्टेंट, कैमरामैन सहित सेट पर मौजूद सभी लोगों को देखते थे। उस समय गुरुदत्त ने एक असिस्टेंट रखा हुआ था जो मेरे रिहर्सल के दौरान की सभी बातें लिखता था। हम ऐसे साथ में काम करते थे।’
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जॉनी वाकर ने गुरुदत्त की कई फिल्मों मे काम किया जिनमें 'आर-पार', 'प्यासा', 'चौदहवी का चांद', 'कागज के फूल', 'मिस्टर एंड मिसेज 55' जैसी सुपर हिट फिल्में शामिल हैं। कहते हैं कि रुलाने से कहीं ज्यादा मुश्किल होता है, हंसाना और जीते जी इसी की मिसाल कायम कर गए बॉलीवुड के बेहतरीन कॉमेडियन जॉनी वॉकर।