हिंदी सिनेमा की ‘मोना डार्लिंग’ का आज जन्मदिन है। फिल्मों में विलेन की चहेती का किरदार निभाने वाली बिंदु ने अपनी अलग ही पहचान बनाई थी। 70 और 80 के दशक में खलनायिका का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री बिंदु का जन्म 17 अप्रैल 1941 को गुजरात में हुआ था। बिंदु के अभिनय को लोग इतना पसंद करते थे कि उस समय में उनके रोल की हीरोइन से ज्यादा पूछ थी। फिल्म ‘जंजीर’ में बिंदु ने मोना नाम की लड़की का किरदार निभाया था, जिसे विलेन अजीत 'मोना डार्लिंग' कहकर बुलाया करते थे। इसके बाद ही उनका नाम मोना डार्लिंग पड़ गया।
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बिंदु नानाभाई
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रोड्यूसर नानाभाई और थिएटर एक्ट्रेस ज्योत्सना की बेटी बिंदु नानाभाई ने छोटी से उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। उनके पिता चाहते थे कि उनकी बेटी डॉक्टर बने, लेकिन जब वह 13 साल की थी तो उनके पिता का निधन हो गया था। बिंदु बचपन से ही ग्लैमर की दुनिया से मोहित थी और उन्हें भी कलाकार बनना था। हालांकि पिता के निधन के बाद पूरे घर की जिम्मेदारी उन पर थी। ऐसे में उन्होंने बेहद कम उम्र में ही शादी कर ली थी और मॉडलिंग शुरू की।
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बिंदु नानाभाई
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शादी के बाद बिंदु के करियर को एक नई पहचान मिली। उन्हें शादी के एक साल बाद ही राजेश खन्ना के साथ 1969 में ‘दो रास्ते’ साइन की। इसके बाद उन्हें ‘इत्तफाक’, ‘आया सावन झूम के’, ‘डोली’ जैसी फिल्मों में वह नजर आई थीं। 1997 में बिंदु को राजेश खन्ना के साथ ‘कटी पतंग’ फिल्म मिली। इसमें उन्होंने शबनम का किरदार निभाया था। वहीं, उनका एक डायलॉग, ‘मेरा नाम है शबनम और प्यार से लोग मुझे शब्बो कहकर बुलाते हैं’, काफी फेमस हो गया था। लोग उनके शब्बो कहकर भी बुलाने लगे थे।
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बिंदु नानाभाई
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बिंदु ने फिल्मों में मेन लीड का किरदार ना निभाकर नेगेटिव किरदारों को चुना और अपनी अलग पहचान बनाने में वह कामयाब रहीं। बिंदु ने बताया था कि एक बार वह अपनी बहन के बच्चों के साथ उनकी ही फिल्म को देखने थिएटर गई थीं। इस दौरान बच्चे डर गए और उन्होंने बिंदु से पूछा कि आप हमारे साथ तो ऐसा नहीं करती, फिर फिल्मों में क्यों?
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बिंदु नानाभाई
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आपको बता दें कि बंदु ने कुछ डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में भी काम किया था। वहीं, 1988 में रिलीज हुई सलमान खान की फिल्म ‘बीवी हो तो ऐसी’ में उन्होंने अपने से तीन साल बड़े फारुख शेख की मां और महज चार साल छोटी रेखा की सास का किरदार निभाया था। वह हीरोइन बनना चाहती थीं, लेकिन उन्हें पहचान नेगेटिव किरदारों ने ही दिलाई। उन्होंने ‘इम्तिहान’, ‘हवस’, ‘अमर प्रेम’, ‘मेरे जीवन साथी’ और ‘जंजीर’ जैसी कई फिल्मों में काम किया है, जिसमें उनकी अदाकारी को काफी सराहा है।