भगवान शिव के बड़े भक्त माने जाने वाले टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की 12 अगस्त को 21वीं पुण्यतिथि है। साल 1997 में इसी दिन मंदिर के बाहर पेशेवर अपराधी ने उन्हें गोली मार दी थी। ऐसे में जानेंगे कि दिल्ली में जूस बेचने वाला ये शख्स टी-सीरीज जैसी इंटरनेशनल म्यूजिक कंपनी का मालिक कैसे बन गया था..
बता दें कि गुलशन कुमार दुआ का जन्म एक पंजाबी परिवार में साल 1956 में दिल्ली में हुआ था। दिल्ली के मशहूर इलाके दरिया गंज में उनके पिता की एक जूस की दुकान थी जहां गुलशन उनका साथ देते थे। गुलशन ने दिल्ली के देशबंधु कॉलेज से स्नातक की डिग्री भी हासिल की थी।
लेकिन गुलशन कुमार इस काम से ऊब गए थे। ऐसे में एक दिन उनके पिता चंद्रभान ने एक दुकान और कर ली जिसमें सस्ती कैसेट्स और गाने रिकॉर्ड कर बेचे जाते थे। बस यहीं से गुलशन कुमार ने अपने करियर को हवा देना शुरू कर दिया था। देखते ही देखते गुलशन ने सुपर कैसेट्स के नाम से पहचान बना ली।
इसके बाद तो गुलशन ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक प्रोड्क्शन कंपनी भी खोल ली। धीरे-धीरे वह भक्ति गीत और भजन गाने के चलते लोगों में जगह बना बैठे। गुलशन ने बढ़ते व्यापार को देख आर्थिक और फिल्मी नगरी मुंबई में कदम रखना मुनासिब समझा।
मुंबई जाने के बाद गुलशन ने तकरीबन 15 से ज्यादा फिल्में प्रोड्यूस की जिनमें एक फिल्म 'बेवफा सनम' को उन्होंने डायरेक्ट भी किया। उनकी पहली प्रोड्यूस की गई फिल्म साल 1989 में आई 'लाल दुपट्टा मलमल का' थी। लेकिन उन्हें असल पहचान साल 1990 में आई फिल्म 'आशिकी' से मिली। इस फिल्म के गीत आज भी लोगों की जुबां पर रटे हुए हैं।