देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की अब तक बनी रही सियासी छवि की चमक हटाने और उनके अहम मौकों पर फैसला न ले पाने की आदतो को हिंदी सिनेमा और वेब सीरीज में बहुत ही चतुराई से बुनने की कोशिशों इन दिनों हिंदी सिनेमा में चल रही हैं। सूत्र बताते हैं कि इसके लिए हिंदी फिल्म निर्माताओं के बीच कुछ ऐसे लोगों की टोली सक्रिय है जो इन्हें इस तरह की कहानियां निकालकर दे रहे हैं जिनमें कांग्रेस नेताओं के अनिश्चय की स्थिति में रहने के चलते देश को हुए नुकसान की गाथाएं हैं। लेकिन, निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में नेहरू के निजी जीवन से जुड़ी बात को सार्वजनिक करने के प्रयासों पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने ही पानी फेर दिया है और ये बात हिंदी फिल्म जगत के उन लोगों को रास नहीं आ रही है जो किसी न किसी तरह से दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े हैं।
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रॉकेट बॉयज
- फोटो : सोशल मीडिया
सोनी लिव पर हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘रॉकेट ब्वॉयज’ में देश के प्रथम प्रधाननमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को शराब और सिगार पीते हुए दिखाया गया है। वह एक जगह पर होमी जहांगीर भाभा के साथ पियानो बजाते भी दिखते हैं। लेकिन इस सीरीज का क्लाइमेक्स वहां आता है जहां भाभा और नेहरू के बीच पहले परमाणु बम बनाने के एलान को लेकर जुबानी जंग होती है। सीरीज दिखाती है कि नेहरू के इस मामले में फैसला न कर पाने की कमजोरी के चलते ही भारत 1962 का युद्ध चीन से हार गया। एम्मे एंटरटेनमेंट के सूत्र बताते हैं कि इस कहानी का ये सीन शूट होने के बाद इसकी चर्चा अरसे तक रही और तमाम ऐसे लोगों ने इस सीन को आकर देखा जिनका वेब सीरीज के निर्माण से सीधा नाता नहीं था।
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गंगूबाई काठियावाड़ी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नेहरू के आभा मंडल पर दाग लगाने वाली अगली कोशिश निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में होती दिखने वाली है। ये सर्वविदित है कि बदमाशों के परेशान करने पर कमाठीपुरा की दमदार कोठेवाली गंगूबाई ने उस समय देश के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से मदद मांगी तो नेहरू ने उन्हे मिलने का बुलावा भेज दिया। इस मुलाकात को भंसाली ने फिल्म में अपने ही अंदाज में फिल्माया है। मुलाकात के बाद नेहरू के गंगूबाई के प्रति आकर्षण को दिखाने के लिए उन्हें गंगूबाई को गुलाब का फूल देते हुए दिखाया गया। लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड ने इस सीन पर कैंची चला दी है।
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गंगूबाई काठियावाड़ी
- फोटो : सोशल मीडिया
गंगूबाई काठियावाड़ी को नेहरू के गुलाब का फूल देते सीन पर कैंची चलने वाले दृश्य को फिल्म से हटाए जाने के बाद फिल्म जगत में बीते कुछ साल से सक्रिय एक खास टोली काफी नाराज है। इस टोली का मकसद हाल के दिनों में यही रहा है कि फिल्मों में कांग्रेस शासनकाल की ऐसी घटनाएं उजागर की जाएं जो इनके नेताओं की निजी और पेशेवर कमजोरियां उजागर कर सकें। लेकिन, सेंसर बोर्ड के उनकी इस योजना पर फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में पानी फेर देने की बात अब धीरे धीरे बाहर आने लगी है। संजय लीला भंसाली के जन्मदिन पर रिलीज होने जा रही इस फिल्म का प्रीमियर बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में 16 फरवरी को होना है।