मनोरंजन जगत की चमचमाती दुनिया में ऊपर बढ़ने का ख्वाब तो हर कोई देखता है लेकिन कम लोग ही अपने सपनों को पूरा कर पाते हैं। आज हमें जो सितारे सफलता की बुलंदियों पर नजर आते हैं उन्होंने भी कड़ा संघर्ष कर खुद को इस मुकाम तक पहुंचाया है। जब उनके पुरानी फिल्मी सफर पर नजर जाती है तो पता चलता है कि उन्होंने कितनी मेहनत से यह रास्ता हासिल किया है।
जीतेंद्र को जब बनना पड़ा हीरोइन
इसमें जंपिग जैक के नाम से मशहूर अभिनेता जीतेंद्र का नाम भी शामिल है जिन्होंने इंडस्ट्री में अपना एक अलग रुतबा बनाया। हालांकि जीतेंद्र के लिए भी यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। अपने गुड लुक्स और दमदार अभिनय से सबको दीवाना बना देने वाले जीतेंद्र के साथ कभी ऐसा हुआ था जब फिल्म में उन्हें हीरोइन बनना पड़ा था।
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जीतेंद्र
- फोटो : Social media
दरअसल यह बात 60 के दशक की है जब जीतेंद्र फिल्म इंडस्ट्री में नए नए आए थे और उनकी आंखों में हीरो बनने का सपना पल रह था। संघर्ष का दौर जारी था और जीतेंद्र अच्छी फिल्म की तलाश में थे। इसी दौरान उन्हें एक फिल्म का ऑफर मिला। फिल्म का नाम था नवरंग जिसे उस जमाने के मशहूर निर्देशक वी. शांताराम निर्देशित कर रहे थे।
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जीतेंद्र
- फोटो : jeetendra
जीतेंद्र को फिल्म ऑफर हुई तो वह खुशी से फूले नहीं समाए। उन्होंने सोचा कि इतने बड़े निर्देशक ने उन्हें फिल्म में हीरो का रोल दिया है। हालांकि उन्हें जब सच्चाई पता चली तो उनके होश उड़ गए। दरअसल इस फिल्म में उन्हें हीरो नहीं बल्कि हीरोइन के बॉडी डबल का रोल करना था।
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जीतेंद्र
- फोटो : सोशल मीडिया
जीतेंद्र मायूस तो हुए लेकिन वह किसी भी कीमत पर शांताराम की फिल्म नहीं छोड़ना चाहते थे। ऐसे मे वह हीरोइन के बॉडी डबल के तौर पर काम करने को तैयार हो गए। जीतेंद्र ने इससे जुड़ा एक किस्सा बताया कि, 'हम बीकानेर में शूटिंग कर रहे थे। शांताराम को देरी पसंद नहीं थी। मैं रात के खाने के लिए देर से पहुंचा तो वह नाराज हो गए और मुझे वापस जाने को कह दिया। उन्होंने मेरे मेकअप मैन से कहा कि वह अगले दिन मुझे तैयार ना करे'।
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जीतेंद्र
- फोटो : अमर उजाला
जीतेंद्र ने कहा कि, 'सुबह मैं पांच बठे उठा और मेकअप मैन से कहा कि वह मुझे तैयार करे। मैं रोते हुए वी शांताराम के कमरे में गया तो वह मेरी तैयारी देखकर हैरान रह गए और फिर मैंने अपने काम से उन्हें खुश कर दिया।इसके बाद फिल्म में मुझे संध्या के बॉडी डबल का रोल मिल गया'। यह फिल्म हिट हुई थी लेकिन जीतेंद्र को इससे कोई फायदा नहीं मिला। इसके बाद साल 1964 में आई फिल्म गीत गाया पत्थरों में जीतेंद्र नजर आई जो खास सफल नहीं हुई। साल 1967 में आई फिल्म फर्ज ने जीतेंद्र के करियर में चार चांद लगाए और फिर कई बेहतरीन हिट फिल्में देकर वह इंडस्ट्री के सुपरस्टार बन गए।