बड़े पर्दे पर कुछ किरदारों की अहमियत फिल्म के हीरो से ज्यादा होती है। इनमें जितनी बुराइयां होती हैं उतना ही हीरो महान बन जाता है। ये पर्दे पर जब-जब पिटते हैं सिनेमा हॉल में सीटियां गूंज जाती हैं। कहने को ये सिनेमा विलेन हैं लेकिन इनकी अहमियत हीरो से कम नहीं। उम्र के साथ इन एक्टर्स को लोग भूल जाते हैं। भूले हुए इन किरदारों को समेटने का काम फजले गुफरान ने अपनी किताब में किया है।
2 of 6
मैं हूं खलनायक
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म जगत में एक दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे फजले गुफरान ने बॉलीवुड के खलनायकों के सफर पर ‘मैं हूं खलनायक' पुस्तक लिखी है। उन्होंने इस किताब में एक सौ से ज्यादा खलनायकों के जीवन और करियर में हुए उतार-चढ़ाव के बारे में बताया गया है। फजले ने 40-50 साल पीछे जाकर उन खलनायकों को ढूंढ कर अपनी किताब में जीवित करने की कोशिश की है, जो कहीं धुंधले से पड़े थे।
'मैं हूं खलनायक' के जरिये खलनायकों की जिंदगी के हर उस पड़ाव पर रोशनी डालने की कोशिश की है जो उन्होंने पर्दे से उतरकर जिया। उनकी इस किताब में प्राण, अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा, गुलशन ग्रोवर, डैनी, अमजद खान, कादर खान, कुलभूषण खरबंदा, सदाशिव अमरापुरकर, शक्ति कपूर, प्रेमनाथ, जीवन, रज़ा मुराद जैसे तमाम खलनायकों का जिंदगी स्याही है।
विलेन अब बॉलीवुड में इतना महत्वपूर्ण हो चुका है कि बड़े सुपर स्टार भी विलेन बनने की चाहत रखते हैं। फजले की इस किताब में विलेन का किरदार निभा चुके शाहरुख खान, जॉन अब्राहम, आमिर खान, सोनू सूद, विवेक ओबेरॉय, अजय देवगन, अक्षय कुमार, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, रणवीर सिंह सहित कई और कलाकार भी हैं।
'मोगैंबो खुश हुआ', बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना, आंखें निकाल कर गोटियां खेलूंगा…आऊ सहित विलेन द्वारा बोले गए कई डायलॉग अमर हो गए। मिस्टर इंडिया का ‘मोगैम्बो', शोले का 'गब्बर', शान का 'शाकाल' सहित ऐसे कई सारे किरदार हैं जो हमेशा याद किए जाते रहेंगे।