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‘मदर इंडिया’ से ‘नई नवेली’ तक: कहीं जिद तो कहीं हौसले की उड़ान; दर्शकों ने अपनाईं यह महिला केंद्रित फिल्में
Sun, 25 Oct 2026 08:29 AM IST
राजश्री वर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: राजश्री वर्मा
Updated Sun, 25 Oct 2026 08:29 AM IST
सार
- यामी गौतम स्टारर फिल्म 'नई नवेली' सिनेमाघरों में अच्छा बिजनेस कर रही है।
- वुमन सेंट्रिक यह मूवी दर्शकों को काफी पसंद आ रही है।
- ऐसे में चलिए जानते हैं सबसे ज्यादा चर्चित वुमन सेंट्रिक फिल्मों के बारे में।
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बॉलीवुड की वुमन सेंट्रिक फिल्में
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यामी गौतम स्टारर फिल्म 'नई नवेली' ने आठ दिनों में दुनियाभर में करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। यह मूवी 'प्रहार' जैसी फिल्मों को टक्कर दे रही है। बालाजी मोहन के निर्देशन में बनी यामी गौतम की फिल्म 'नई नवेली' एक हॉरर-कॉमेडी है, जिसमें अभिनेत्री ने मोहिनी नाम की रहस्यमयी बहू का किरदार निभाया है, जिसे देखने के बाद डर का माहौल बनने लगता है। ऐसे में फिल्म की कहानी, कमाई और एक्ट्रेस के अभिनय ने इसे एक बार फिर बॉलीवुड की महिला प्रधान फिल्मों को चर्चा में ला दिया है।
कभी हीरो के नाम पर टिकट बेचने वाली इंडस्ट्री में अब अभिनेत्रियां भी अपने दम पर दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रही हैं। ऐसे में आइए इस फिल्म के साथ-साथ अब जानते हैं उन चर्चित वुमन सेंट्रिक फिल्मों के बारे में, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के साथ महिला किरदारों की ताकत भी दिखाई।
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कभी हीरो के नाम पर टिकट बेचने वाली इंडस्ट्री में अब अभिनेत्रियां भी अपने दम पर दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच रही हैं। ऐसे में आइए इस फिल्म के साथ-साथ अब जानते हैं उन चर्चित वुमन सेंट्रिक फिल्मों के बारे में, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के साथ महिला किरदारों की ताकत भी दिखाई।
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मदर इंडिया
- फोटो : सोशल मीडिया
1. मदर इंडिया
नरगिस स्टारर 'मदर इंडिया' भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार महिला प्रधान फिल्मों में शामिल है। महबूब खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म राधा नाम की महिला की कहानी है, जो गरीबी, कर्ज और सामाजिक मुश्किलों के बीच अपने बच्चों की परवरिश करती है।
पति के साथ छोड़ जाने के बाद भी राधा हार नहीं मानती और अकेले अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाती है। फिल्म में एक मां के संघर्ष, स्वाभिमान और न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाया गया है। कहानी में ऐसा मोड़ भी आता है, जब राधा को अपने बेटे के खिलाफ कठोर फैसला लेना पड़ता है।
नरगिस के दमदार अभिनय ने इस किरदार को अमर बना दिया। 'मदर इंडिया' सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म की श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी थी।
नरगिस स्टारर 'मदर इंडिया' भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार महिला प्रधान फिल्मों में शामिल है। महबूब खान के निर्देशन में बनी यह फिल्म राधा नाम की महिला की कहानी है, जो गरीबी, कर्ज और सामाजिक मुश्किलों के बीच अपने बच्चों की परवरिश करती है।
पति के साथ छोड़ जाने के बाद भी राधा हार नहीं मानती और अकेले अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाती है। फिल्म में एक मां के संघर्ष, स्वाभिमान और न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाया गया है। कहानी में ऐसा मोड़ भी आता है, जब राधा को अपने बेटे के खिलाफ कठोर फैसला लेना पड़ता है।
नरगिस के दमदार अभिनय ने इस किरदार को अमर बना दिया। 'मदर इंडिया' सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म की श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी थी।
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दामिनी फिल्म पोस्टर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
2. मिर्च मसाला
केतन मेहता के निर्देशन में बनी फिल्म 'मिर्च मसाला' महिलाओं के साहस, आत्मसम्मान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की कहानी है। फिल्म में स्मिता पाटिल ने सोनबाई का किरदार निभाया है, जो एक ताकतवर सूबेदार की बुरी नजरों का शिकार होती है। हालांकि, वह उसके सामने झुकने के बजाय उसका डटकर मुकाबला करती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक महिला अपने सम्मान की रक्षा के लिए समाज की रूढ़िवादी सोच और पुरुष प्रधान व्यवस्था को चुनौती देती है। यह फिल्म महिला एकजुटता और सशक्तिकरण का मजबूत संदेश देती है।
3. दामिनी
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म 'दामिनी' एक ऐसी महिला की कहानी है, जो सच और इंसाफ के लिए अपने परिवार और समाज के खिलाफ खड़ी हो जाती है। फिल्म में मीनाक्षी शेषाद्रि ने दामिनी का किरदार निभाया है। दामिनी अपने घर में काम करने वाली एक युवती के साथ हुए दुष्कर्म की गवाह बनती है और उसे न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करती है। इस लड़ाई में उसे कई मुश्किलों, धमकियों और पारिवारिक दबाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह हार नहीं मानती। यह फिल्म महिलाओं के साहस, न्याय और सच्चाई के लिए लड़ने की ताकत को दर्शाती है।
केतन मेहता के निर्देशन में बनी फिल्म 'मिर्च मसाला' महिलाओं के साहस, आत्मसम्मान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की कहानी है। फिल्म में स्मिता पाटिल ने सोनबाई का किरदार निभाया है, जो एक ताकतवर सूबेदार की बुरी नजरों का शिकार होती है। हालांकि, वह उसके सामने झुकने के बजाय उसका डटकर मुकाबला करती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक महिला अपने सम्मान की रक्षा के लिए समाज की रूढ़िवादी सोच और पुरुष प्रधान व्यवस्था को चुनौती देती है। यह फिल्म महिला एकजुटता और सशक्तिकरण का मजबूत संदेश देती है।
3. दामिनी
राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म 'दामिनी' एक ऐसी महिला की कहानी है, जो सच और इंसाफ के लिए अपने परिवार और समाज के खिलाफ खड़ी हो जाती है। फिल्म में मीनाक्षी शेषाद्रि ने दामिनी का किरदार निभाया है। दामिनी अपने घर में काम करने वाली एक युवती के साथ हुए दुष्कर्म की गवाह बनती है और उसे न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करती है। इस लड़ाई में उसे कई मुश्किलों, धमकियों और पारिवारिक दबाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह हार नहीं मानती। यह फिल्म महिलाओं के साहस, न्याय और सच्चाई के लिए लड़ने की ताकत को दर्शाती है।
इंग्लिश-विंग्लिश
- फोटो : यूट्यूब
4. इंग्लिश विंग्लिश
श्रीदेवी स्टारर 'इंग्लिश विंग्लिश' एक साधारण गृहिणी के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की खूबसूरत कहानी है। गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में श्रीदेवी ने शशि नाम की महिला का किरदार निभाया है, जो अपने परिवार का पूरा ध्यान रखती है, लेकिन अंग्रेजी नहीं बोल पाने के कारण उसे घर में ही मजाक का सामना करना पड़ता है।
जब शशि अमेरिका जाती है, तो वह अंग्रेजी सीखने का फैसला करती है। इस सफर में वह न सिर्फ नई भाषा सीखती है, बल्कि अपने आत्मविश्वास और पहचान को भी दोबारा हासिल करती है। यह फिल्म बताती है कि किसी व्यक्ति की काबिलियत उसकी भाषा से नहीं आंकी जा सकती। लंबे अंतराल के बाद श्रीदेवी की इस फिल्म से वापसी हुई थी और उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
श्रीदेवी स्टारर 'इंग्लिश विंग्लिश' एक साधारण गृहिणी के आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की खूबसूरत कहानी है। गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में श्रीदेवी ने शशि नाम की महिला का किरदार निभाया है, जो अपने परिवार का पूरा ध्यान रखती है, लेकिन अंग्रेजी नहीं बोल पाने के कारण उसे घर में ही मजाक का सामना करना पड़ता है।
जब शशि अमेरिका जाती है, तो वह अंग्रेजी सीखने का फैसला करती है। इस सफर में वह न सिर्फ नई भाषा सीखती है, बल्कि अपने आत्मविश्वास और पहचान को भी दोबारा हासिल करती है। यह फिल्म बताती है कि किसी व्यक्ति की काबिलियत उसकी भाषा से नहीं आंकी जा सकती। लंबे अंतराल के बाद श्रीदेवी की इस फिल्म से वापसी हुई थी और उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
कहानी फिल्म
- फोटो : सोशल मीडिया
5.. कहानी
विद्या बालन की 'कहानी' महिला प्रधान सस्पेंस फिल्मों की बेहतरीन मिसाल मानी जाती है। सुजॉय घोष के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विद्या ने एक गर्भवती महिला का किरदार निभाया, जो अपने लापता पति की तलाश में कोलकाता पहुंचती है।
फिल्म ने भारत में लगभग 51.55 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। कम बजट, मजबूत पटकथा और शानदार अभिनय के दम पर फिल्म सफल रही। 'कहानी' ने दिखाया कि दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए बड़े सितारों से ज्यादा जरूरी दिलचस्प कहानी और दमदार प्रस्तुति ही काफी है।
विद्या बालन की 'कहानी' महिला प्रधान सस्पेंस फिल्मों की बेहतरीन मिसाल मानी जाती है। सुजॉय घोष के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विद्या ने एक गर्भवती महिला का किरदार निभाया, जो अपने लापता पति की तलाश में कोलकाता पहुंचती है।
फिल्म ने भारत में लगभग 51.55 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। कम बजट, मजबूत पटकथा और शानदार अभिनय के दम पर फिल्म सफल रही। 'कहानी' ने दिखाया कि दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए बड़े सितारों से ज्यादा जरूरी दिलचस्प कहानी और दमदार प्रस्तुति ही काफी है।
क्वीन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
6. क्वीन
कंगना रनौत की 'क्वीन' ने बॉलीवुड में महिला प्रधान फिल्मों को नई पहचान दिलाई। फिल्म की कहानी एक ऐसी लड़की के बारे में है, जो शादी टूटने के बाद अकेले हनीमून पर निकल जाती है। इस यात्रा में वह अपनी पहचान और आत्मविश्वास तलाशती है।
करीब 12 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने भारत में लगभग 61 करोड़ रुपये का नेट कारोबार किया था। फिल्म को समीक्षकों की सराहना के साथ दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। कंगना को इस अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
कंगना रनौत की 'क्वीन' ने बॉलीवुड में महिला प्रधान फिल्मों को नई पहचान दिलाई। फिल्म की कहानी एक ऐसी लड़की के बारे में है, जो शादी टूटने के बाद अकेले हनीमून पर निकल जाती है। इस यात्रा में वह अपनी पहचान और आत्मविश्वास तलाशती है।
करीब 12 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने भारत में लगभग 61 करोड़ रुपये का नेट कारोबार किया था। फिल्म को समीक्षकों की सराहना के साथ दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। कंगना को इस अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
फिल्म 'पिंक' में तापसी, कीर्ति कुल्हारी, अमिताभ बच्चन
- फोटो : सोशल मीडिया
7. पिंक
तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी और एंड्रिया तारियांग अभिनीत 'पिंक' महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सहमति जैसे गंभीर मुद्दों को उठाती है। अनिरुद्ध रॉय चौधरी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तीन युवतियों की कहानी दिखाई गई है, जो एक घटना के बाद कानूनी लड़ाई में उलझ जाती हैं।
समाज उनके कपड़ों, रहन-सहन और चरित्र पर सवाल उठाता है, लेकिन वे अपने सम्मान के लिए संघर्ष करती हैं। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने वकील की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 'नो मीन्स नो' का संदेश इस फिल्म की सबसे बड़ी पहचान बना। 'पिंक' ने यह दिखाया कि किसी महिला की सहमति के बिना उसके साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती गलत है।
तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी और एंड्रिया तारियांग अभिनीत 'पिंक' महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सहमति जैसे गंभीर मुद्दों को उठाती है। अनिरुद्ध रॉय चौधरी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तीन युवतियों की कहानी दिखाई गई है, जो एक घटना के बाद कानूनी लड़ाई में उलझ जाती हैं।
समाज उनके कपड़ों, रहन-सहन और चरित्र पर सवाल उठाता है, लेकिन वे अपने सम्मान के लिए संघर्ष करती हैं। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने वकील की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 'नो मीन्स नो' का संदेश इस फिल्म की सबसे बड़ी पहचान बना। 'पिंक' ने यह दिखाया कि किसी महिला की सहमति के बिना उसके साथ किसी भी तरह की जबरदस्ती गलत है।
थप्पड़ फिल्म की रिलीज को पांच साल पूरे
- फोटो : इंस्टाग्राम
8. थप्पड़
तापसी पन्नू अभिनीत 'थप्पड़' एक ऐसी महिला की कहानी है, जो अपनी शादीशुदा जिंदगी में आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखती है। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तापसी ने अमृता का किरदार निभाया है।
अमृता अपने पति और परिवार की खुशियों में ही अपनी खुशी तलाशती है, लेकिन एक पार्टी में पति द्वारा सबके सामने थप्पड़ मारने की घटना उसकी जिंदगी बदल देती है। इसके बाद वह अपने रिश्ते और समाज की सोच पर सवाल उठाने लगती है।
फिल्म बताती है कि किसी भी रिश्ते में सम्मान कितना जरूरी है। 'थप्पड़' ने घरेलू हिंसा, महिलाओं के अधिकार और आत्मसम्मान जैसे मुद्दों पर समाज में बड़ी बहस छेड़ी थी।
तापसी पन्नू अभिनीत 'थप्पड़' एक ऐसी महिला की कहानी है, जो अपनी शादीशुदा जिंदगी में आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखती है। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तापसी ने अमृता का किरदार निभाया है।
अमृता अपने पति और परिवार की खुशियों में ही अपनी खुशी तलाशती है, लेकिन एक पार्टी में पति द्वारा सबके सामने थप्पड़ मारने की घटना उसकी जिंदगी बदल देती है। इसके बाद वह अपने रिश्ते और समाज की सोच पर सवाल उठाने लगती है।
फिल्म बताती है कि किसी भी रिश्ते में सम्मान कितना जरूरी है। 'थप्पड़' ने घरेलू हिंसा, महिलाओं के अधिकार और आत्मसम्मान जैसे मुद्दों पर समाज में बड़ी बहस छेड़ी थी।
गंगूबाई काठियावाड़ी
- फोटो : इंस्टाग्राम@aliabhatt
9. गंगूबाई काठियावाड़ी
संजय लीला भंसाली की 'गंगूबाई काठियावाड़ी' ने साबित किया कि बड़े बजट की फिल्म को सफल बनाने के लिए पुरुष सुपरस्टार का होना जरूरी नहीं है। आलिया भट्ट ने गंगूबाई के किरदार में अपनी अभिनय क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
फिल्म ने भारत में लगभग 132 करोड़ रुपये का नेट कारोबार किया, जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई करीब 211 करोड़ रुपये रही। कोरोना महामारी के बाद सिनेमाघरों में दर्शकों की वापसी के लिहाज से भी इस फिल्म की सफलता महत्वपूर्ण रही।
संजय लीला भंसाली की 'गंगूबाई काठियावाड़ी' ने साबित किया कि बड़े बजट की फिल्म को सफल बनाने के लिए पुरुष सुपरस्टार का होना जरूरी नहीं है। आलिया भट्ट ने गंगूबाई के किरदार में अपनी अभिनय क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।
फिल्म ने भारत में लगभग 132 करोड़ रुपये का नेट कारोबार किया, जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई करीब 211 करोड़ रुपये रही। कोरोना महामारी के बाद सिनेमाघरों में दर्शकों की वापसी के लिहाज से भी इस फिल्म की सफलता महत्वपूर्ण रही।
लापता लेडीज
- फोटो : Instagram/ Kiran Rao
10. लापता लेडीज
किरण राव के निर्देशन में बनी फिल्म 'लापता लेडीज' महिलाओं की पहचान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक रूढ़ियों पर सवाल उठाती है। फिल्म की कहानी दो नई नवेली दुल्हनों, फूल और जया, के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी के बाद ट्रेन यात्रा के दौरान गलती से बदल जाती हैं।
एक तरफ फूल अपने पति से बिछड़कर अनजान जगह पहुंच जाती है, तो दूसरी ओर जया इस मौके को अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने और पढ़ाई के सपने को साकार करने के अवसर के रूप में देखती है। फिल्म में नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा और स्पर्श श्रीवास्तव ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
हास्य और भावनाओं के जरिए फिल्म बाल विवाह, पितृसत्तात्मक सोच, महिलाओं की शिक्षा और उनकी स्वतंत्र पहचान जैसे मुद्दों को उठाती है। आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से खूब सराहना मिली।
'लापता लेडीज' को ऑस्कर 2025 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री भी चुना गया था। फिल्म यह संदेश देती है कि महिलाओं की पहचान सिर्फ किसी की पत्नी या बहू होने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने सपने पूरे करने और जिंदगी के फैसले खुद लेने का अधिकार है।
किरण राव के निर्देशन में बनी फिल्म 'लापता लेडीज' महिलाओं की पहचान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक रूढ़ियों पर सवाल उठाती है। फिल्म की कहानी दो नई नवेली दुल्हनों, फूल और जया, के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी के बाद ट्रेन यात्रा के दौरान गलती से बदल जाती हैं।
एक तरफ फूल अपने पति से बिछड़कर अनजान जगह पहुंच जाती है, तो दूसरी ओर जया इस मौके को अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने और पढ़ाई के सपने को साकार करने के अवसर के रूप में देखती है। फिल्म में नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा और स्पर्श श्रीवास्तव ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
हास्य और भावनाओं के जरिए फिल्म बाल विवाह, पितृसत्तात्मक सोच, महिलाओं की शिक्षा और उनकी स्वतंत्र पहचान जैसे मुद्दों को उठाती है। आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से खूब सराहना मिली।
'लापता लेडीज' को ऑस्कर 2025 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री भी चुना गया था। फिल्म यह संदेश देती है कि महिलाओं की पहचान सिर्फ किसी की पत्नी या बहू होने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने सपने पूरे करने और जिंदगी के फैसले खुद लेने का अधिकार है।