संजय मिश्रा की एक्टिंग देख इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वह सिर्फ कॉमेडियन हैं। अपनी एक्टिंग के दम पर संजय मिश्रा ने बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। संजय ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन सीरियल ‘चाणक्य’ से की थी, इससे पहले उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का कई बार मौका मिला लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब ये एक्टिंग छोड़-छाड़कर एक ढाबे पर काम करने लग गए थे।
'कड़वी हवा' और 'अंग्रेजी में कहते हैं' जैसी फिल्मों से अपने अभिनय की नई बयार बहाने वाले संजय मिश्रा 'टोटल धमाल' और 'कामयाब' में नजर आने वाले हैं। 2015 में संजय को ‘आंखों देखी’ के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्टर से नवाजा गया था।
संजय मिश्रा आज के नामी एक्टर और कॉमेडियन हैं। उनके पास फिल्मों का लाइन लगी रहती है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब वो एक्टिंग छोड़-छाड़कर ऋषिकेश चले गए थे और एक ढाबे पर काम करने लगे। दरअसल जब उनके पिता का देहांत हुआ तो इस घटना ने उन्हें ऐसा झकझोरा कि वो गुमशुदा हो गए और अकेला महसूस करने लगे। उनका कहीं मन नहीं लग रहा था। उनका मन वापस मुंबई जाने का भी नहीं हुआ और एक्टिंग छोड़
दी।
एक दिन अचानक ही संजय मिश्रा ने घर छोड़ दिया और ऋषिकेश चले गए। वहां संजय मिश्रा एक ढाबे पर काम करने लगे। संजय सौ से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे लेकिन इतनी फिल्मों के बाद भी उन्हें वो सफलता नहीं मिली जिसके वो हकदार थे। इसी से तंग आकर उन्होंने ढाबे पर ऑमलेट बनाने का काम करना शुरू कर दिया।
लेकिन तभी उनकी जिंदगी में आए रोहित शेट्टी। रोहित शेट्टी और संजय मिश्रा फिल्म 'गोलमाल' में साथ काम कर चुके थे। वो अपनी अगली फिल्म 'ऑल द बेस्ट' पर काम कर रहे थे और उसी दौरान उन्हें संजय मिश्रा का ख्याल आया। संजय मिश्रा फिल्मों लौटने को तैयार नहीं थे, लेकिन रोहित शेट्टी ने उन्हें मनाया और फिल्म में साइन किया। इसके बाद तो फिर संजय मिश्रा ने पलटकर नहीं देखा।