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वेद राही: 'गुल गुलशन गुलफाम' के निर्देशक का निधन, 93 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
Mon, 02 Nov 2026 02:59 PM IST
राजश्री वर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: राजश्री वर्मा
Updated Mon, 02 Nov 2026 02:59 PM IST
सार
- दिग्गज लेखक और फिल्ममेकर वेद राही का निधन हो गया है।
- उन्होंने 93 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया है।
- बता दें कि वेद राही डोगरी साहित्य का एक बड़ा नाम थे।
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वेद राही
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दिग्गज लेखक और फिल्ममेकर वेद राही का निधन हो गया है। उन्होंने रविवार सुबह महाराष्ट्र के ठाणे जिले में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह 93 साल के थे। रविवार दोपहर ठाणे के कोपरी श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके परिवार में दो बेटियां गीतांजलि और पूनम हैं।
डोगरी साहित्य का एक बड़ा नाम वेद राही
वेद राही डोगरी साहित्य का एक बड़ा नाम थे। उन्हें साल 1983 में अपने कहानी संग्रह 'आले' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 2024 में उन्हें साहित्य अकादमी फेलोशिप भी दी गई, जो अकादमी के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कार भी मिले। उनके निधन के बाद साहित्य अकादमी के आधिकारिक एक्स हैंडल से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
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डोगरी साहित्य का एक बड़ा नाम वेद राही
वेद राही डोगरी साहित्य का एक बड़ा नाम थे। उन्हें साल 1983 में अपने कहानी संग्रह 'आले' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद साल 2024 में उन्हें साहित्य अकादमी फेलोशिप भी दी गई, जो अकादमी के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई अन्य पुरस्कार भी मिले। उनके निधन के बाद साहित्य अकादमी के आधिकारिक एक्स हैंडल से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
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वेद राही
- फोटो : सोशल मीडिया
साहित्य अकादमी ने दी श्रद्धांजलि
साहित्य अकादमी ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, 'प्रख्यात डोगरी लेखक, विचारक और फिल्मकार वेद राही जी का आज 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे आधुनिक डोगरी साहित्य के उन स्तंभों में से थे, जिन्होंने अपनी कहानियों, उपन्यासों और कविताओं से डोगरी भाषा को समृद्ध किया। 1983 में उनके डोगरी कहानी-संग्रह 'आले' को साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला, और हाल ही में उन्हें साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान महत्तर सदस्यता से भी सम्मानित किया गया था।
उनके निधन से भारतीय साहित्य, हिंदी सिनेमा और जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति हुई है। साहित्य अकादेमी समस्त साहित्य जगत की ओर से उनके निधन पर विनम्र श्रद्धांजलि निवेदित करती है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवारजनों को यह कठिन दुख सहन करने की शक्ति दे। ॐ शांति ।'
साहित्य अकादमी ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, 'प्रख्यात डोगरी लेखक, विचारक और फिल्मकार वेद राही जी का आज 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे आधुनिक डोगरी साहित्य के उन स्तंभों में से थे, जिन्होंने अपनी कहानियों, उपन्यासों और कविताओं से डोगरी भाषा को समृद्ध किया। 1983 में उनके डोगरी कहानी-संग्रह 'आले' को साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला, और हाल ही में उन्हें साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान महत्तर सदस्यता से भी सम्मानित किया गया था।
उनके निधन से भारतीय साहित्य, हिंदी सिनेमा और जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति हुई है। साहित्य अकादेमी समस्त साहित्य जगत की ओर से उनके निधन पर विनम्र श्रद्धांजलि निवेदित करती है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवारजनों को यह कठिन दुख सहन करने की शक्ति दे। ॐ शांति ।'
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किन फिल्मों का किया लेखन?
साहित्य के अलावा वेद राही ने भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में भी अपनी खास पहचान बनाई थी। उन्होंने 25 से ज्यादा फिल्मों के लिए लेखन किया। इनमें 'ये रात फिर न आएगी', 'आप आए बहार आई', 'बेईमान', 'मोम की गुड़िया' और 'बेजुबान' जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों के लिए उन्होंने स्क्रीनप्ले और डायलॉग लिखे थे।
लेखन के बाद वेद राही ने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने 'प्रेम पर्वत' और 'काली घटा' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इसके अलावा साल 2001 में आई फिल्म 'वीर सावरकर' का निर्देशन भी उन्होंने किया था। खास बात यह है कि 'प्रेम पर्वत' और 'काली घटा' जैसी उनकी कुछ फिल्में आज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि, 1980 और 1990 के दशक के टीवी दर्शकों के बीच वेद राही को खास तौर पर दूरदर्शन के मशहूर सीरियल 'गुल गुलशन गुलफाम' के लिए याद किया जाता है। इसके अलावा 'मीरा' और 'रिश्ते' जैसे शोज में भी उनका योगदान रहा। इन धारावाहिकों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और उनकी कहानियों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया।
साहित्य के अलावा वेद राही ने भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में भी अपनी खास पहचान बनाई थी। उन्होंने 25 से ज्यादा फिल्मों के लिए लेखन किया। इनमें 'ये रात फिर न आएगी', 'आप आए बहार आई', 'बेईमान', 'मोम की गुड़िया' और 'बेजुबान' जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों के लिए उन्होंने स्क्रीनप्ले और डायलॉग लिखे थे।
लेखन के बाद वेद राही ने निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा। उन्होंने 'प्रेम पर्वत' और 'काली घटा' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इसके अलावा साल 2001 में आई फिल्म 'वीर सावरकर' का निर्देशन भी उन्होंने किया था। खास बात यह है कि 'प्रेम पर्वत' और 'काली घटा' जैसी उनकी कुछ फिल्में आज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि, 1980 और 1990 के दशक के टीवी दर्शकों के बीच वेद राही को खास तौर पर दूरदर्शन के मशहूर सीरियल 'गुल गुलशन गुलफाम' के लिए याद किया जाता है। इसके अलावा 'मीरा' और 'रिश्ते' जैसे शोज में भी उनका योगदान रहा। इन धारावाहिकों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई और उनकी कहानियों को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया।
जम्मू में हुआ था जन्म
वेद राही का जन्म मई 1933 में जम्मू में हुआ था। उनका परिवार पत्रकारिता से जुड़ा हुआ था। उनके पिता मुल्क राज सराफ इलाके के जाने-माने और शुरुआती पत्रकारों में से एक थे। वेद राही ने अपने साहित्यिक सफर की शुरुआत अपने होमटाउन जम्मू से की थी। डोगरी भाषा में लेखन के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद वह फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के लिए मुंबई चले गए।
मुंबई आने के बाद उनका करियर साहित्य, सिनेमा और टेलीविजन तक फैल गया। उन्होंने अपनी मातृभाषा डोगरी में कहानियां लिखने से लेकर हिंदी फिल्मों के लिए पटकथा और संवाद लिखने तक का काम किया। इसके अलावा निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। इस तरह वेद राही ने अलग-अलग माध्यमों से अपनी कहानियों को कई पीढ़ियों तक पहुंचाया।
वेद राही का जन्म मई 1933 में जम्मू में हुआ था। उनका परिवार पत्रकारिता से जुड़ा हुआ था। उनके पिता मुल्क राज सराफ इलाके के जाने-माने और शुरुआती पत्रकारों में से एक थे। वेद राही ने अपने साहित्यिक सफर की शुरुआत अपने होमटाउन जम्मू से की थी। डोगरी भाषा में लेखन के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद वह फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के लिए मुंबई चले गए।
मुंबई आने के बाद उनका करियर साहित्य, सिनेमा और टेलीविजन तक फैल गया। उन्होंने अपनी मातृभाषा डोगरी में कहानियां लिखने से लेकर हिंदी फिल्मों के लिए पटकथा और संवाद लिखने तक का काम किया। इसके अलावा निर्देशन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। इस तरह वेद राही ने अलग-अलग माध्यमों से अपनी कहानियों को कई पीढ़ियों तक पहुंचाया।