17 जनवरी 1918 में उत्तर प्रदेश में एक जमीनदार के घर में जन्मे कमाल अमरोही बॉलीवुड में एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने बेहतरीन गीतकार, पठकथा और संवाद लेखक और निर्माता-निर्देशक के रूप में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। महल, मुगल ए आज़म और पाकीजा जैसी सुपरहिट फिल्में देने वाले कमाल अमरोही की जिंदगी भी बड़ी दिलचस्प रही है। चलिए आपको बताते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से-
1930 के दशक में सिनेमा स्क्रिप्ट राइटर को मुंशी कहा जाता था। मुंशी यानी जो चीजों का हिसाब-किताब रखता है। लेकिन कमाल ने कहानी लिखने से पहले ये शर्त रखी कि मुंशी नहीं, राइटर का क्रेडिट दिया जाएगा। कमाल की ये शर्त मान ली गई और राइटर को क्रेडिट दिया जाने लगा। वहीं उनकी इस शर्त की वजह से आने वाले नए लेखकों के लिए भी फिल्मी इंडस्ट्री में जगह बनानी आसान हो गई।
कमाल अमरोही और मीना कुमारी के प्यार के खबरें भी अक्सर सुर्खियों में रही है। साल 1951 में मीना कुमारी का भयानक एक्सीडेंट हो गया था। इस एक्सीडेंट की वजह से उन्हें 3-4 महीनों के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। हालांकि, इसके पहले ही उनकी मुलाकात डायरेक्टर कमाल अमरोही से हो चुकी थी और उन्होंने मीना को अपनी अगली फिल्म 'अनारकली' के लिए साइन भी किया था। हालांकि, ये फिल्म तो कभी नहीं बन पाई लेकिन दोनों में मोहब्बत जरूर हो गई। बता दें कि जब मीना और कमाल की शादी हुई उस वक्त मीना 19 साल की थी तो वहीं कमाल 34 साल के थे।
फिल्म पाकीज़ा कमाल का पैशन थी। फिल्म भी सुपरहिट साबित हुई थी। वहीं जब इस फिल्म की शूटिंग शुरू हुई थी तब कमाल और मीना दो जिस्म एक जान थे, लेकिन जब फिल्म 14 साल में बनकर तैयार हुई तो तब तक सब कुछ बदल गया। फिल्म में हीरो के तौर पर धर्मेंद्र को लिया गया था और उस वक्त मीना और धर्मेंद्र के प्यार के चर्चे भी सुर्खियों में थे।
तमाम कोशिशों के बाद भी कमाल दोनों को दूर नहीं कर पाए तो उन्होंने फिल्म में धर्मेंद्र का रोल राजकुमार को दे दिया गया, लेकिन तब तक कुछ रील शूट हो चुकी थीं। अगर पाकीज़ा के बारात वाले सीन को ध्यान से देखा जाए तो उसमें सेहरा बांधे ग्रे शेरवानी में धर्मेंद्र हैं लेकिन अगले ही सीन में जब सेहरा उठता है तो सफेद शेरवानी में राजकुमार होते हैं।