{"_id":"5ad2c62f4f1c1b9d098b49a7","slug":"birthday-special-hasrat-jaipuri-life-facts","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"B'day Spl: राज कपूर की मौत के बाद हसरत जयपुरी की हालत हो गई थी ऐसी, सालों बिताई गुमनामी में जिंदगी","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
B'day Spl: राज कपूर की मौत के बाद हसरत जयपुरी की हालत हो गई थी ऐसी, सालों बिताई गुमनामी में जिंदगी
Mon, 16 Apr 2018 06:15 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 16 Apr 2018 06:15 AM IST
विज्ञापन
1 of 7
हसरत जयपुरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
राज कपूर की फिल्मों में एक से बढ़कर हिट गाने देने के लिए गीतकार हसरत जयपुरी का नाम विशेष तौर पर जाना जाता है। उनका जन्म 15 अप्रैल 1918 को जयपुर में हुआ था। हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल हुसैन था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई अंग्रेजी में की। बाद में उन्होंने अपने दादा से उर्दू और परशियन भाषा सीखी। 20 साल की उम्र से ही हसरत जयपुरी ने लिखना शुरू कर दिया था। आज उनके जन्मदिन पर आइए हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।
2 of 7
हसरत जयपुरी
हसरत जयपुरी ने शुरुआत में बतौर बस कंडक्टर का काम किया, जिसके लिए उन्हें 11 रुपये हर महीने मिलते थे। हसरत जयपुरी मुशायरों में भी शिरकत करने लगे। एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर ने उनको सुना और राज कपूर से मिलने की बात कही। राज कपूर ने उन्हें फिल्म 'बरसात' में मौका दिया और अपने करियर का पहला गाना 'जिया बेकरार है' लिखा। उनका दूसरा गाना था 'छोड़ गए बालम'।
3 of 7
hasrat jaiuri
फिल्म 'बरसात' में अपने इस गीत की कामयाबी के बाद हसरत जयपुरी गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। इसके बाद राजकपूर, हसरत जयपुरी और शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने कई फिल्मों मे एक साथ काम किया। हसरत जयपुरी की जोड़ी राजकपूर के साथ 1971 तक कायम रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 7
HASRAT JAIPURI
संगीतकार जयकिशन के निधन और फिल्म 'मेरा नाम जोकर' व 'कल आज और कल' की नाकामयाबी के बाद राज कपूर ने हसरत जयपुरी की जगह आनंद बख्शी को अपनी फिल्मों के लिए लेना शुरू कर दिया हालांकि इससे हसरत जयपुरी और राज कपूर की दोस्ती में कोई फर्क नहीं पड़ा।
विज्ञापन
5 of 7
hasrat jaipuri
हर शख्स का एक दौर होता है, हसरत का भी एक दौर था। शैलेंद्र और जयकिशन की मौत के बाद वह बहुत अकेलापन महसूस करने लगे और राज कपूर के निधन के बाद तो वह बिल्कुल ही टूट से गए। उन्होंने लोगों से भी मिलना जुलना कम कर दिया था। 17 सितंबर 1999 को अपनी मौत से पहले कई साल तक हसरत ने गुमनामी में जीवन बिताया।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।