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Bioscope S2: अखबार की एक कटिंग ने बदल दी मनमोहन देसाई की जिंदगी, पत्नी ने सुझाया फिल्म का फॉर्मूला

पंकज शुक्ल
Updated Thu, 27 May 2021 11:25 AM IST
अमर अकबर एंथनी
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अपने करियर की दिशा बदल देने वाली फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ से पहले भी मनमोहन देसाई  ने राजकपूर के साथ ‘छलिया’, शम्मी कपूर के साथ ‘ब्लफमास्टर’, राजेश खन्ना के साथ ‘सच्चा झूठा’ और ‘रोटी’, रणधीर कपूर के साथ ‘रामपुर का लक्ष्मण’ और जीतेंद्र के साथ ‘भाई हो तो ऐसा’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनाईं। लेकिन, कामयाबी का जो दौर उन्होंने फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ के बाद देखा वैसा दौर प्रकाश मेहरा को छोड़ दूसरा कोई निर्देशक हिंदी सिनेमा में नहीं देख पाया। ‘अमर अकबर एंथनी’ की सक्सेस पार्टी में मनमोहन देसाई ने अमिताभ बच्चन से कहा भी था, ‘अब तुम मुझे छोड़कर चले जाओ तो पता नहीं, लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाने वाला।’ अपनी बात पर वह आखिर तक कायम रहे। ‘अमर अकबर एंथनी’ के बाद उन्होंने जो भी फिल्में बनाईं, ‘सुहाग’, ‘नसीब’, ‘देशप्रेमी’, ‘कुली’, ‘मर्द’ और ‘गंगा जमना सरस्वती’, सबके हीरो अमिताभ बच्चन ही रहे।

अमर अकबर एंथनी का पोस्टर
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हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्म
‘अमर अकबर एंथनी’ कई मायनों में एक नई परंपरा की शुरूआत करने वाली फिल्म है। आम बोलचाल में इसे कल्ट फिल्म भी कहा जाता है। ये कहानी तीन अलग अलग धर्मों को मानने वाले नायकों की है और पूरी फिल्म में कहीं भी एक की आस्था दूसरे से टकराती नहीं। नायिकाएं यहां अपने बूते अपनी बात आगे बढ़ाने का माद्दा रखती दिखती हैं यहां तक कि दिन रात बुर्के में रहने के लिए मजबूर की जाने वाली सलमा भी आने वाले कल के बारे में सोचती दिखती है। यहां ये जान लेना भी जरूरी है कि फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ के अधिकतर दृश्य मनमोहन देसाई के साथ काम करने वाले कलाकारों और तकनीशियनों ने ही उनकी गैर मौजूदगी में शूट कर लिए थे। खुद मनमोहन देसाई को कभी यकीन नहीं रहा कि फिल्म इतनी बड़ी हिट होगी। फिल्म में अमिताभ बच्चन का शराब पीकर शीशे के सामने नौटंकी करने वाला सीन भी मनमोहन देसाई की गैरमौजूदगी में ही शूट हुआ है। ये सब इसलिए क्योंकि तब तक वह अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना को लेकर फिल्म ‘परवरिश’ भी शुरू कर चुके थे और वहां अपने पुराने सितारे शम्मी कपूर की मौजूदगी की वजह से उनकी तवज्जो वहां ज्यादा रहती थी।
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अमिताभ बच्चन और मनमोहन देसाई
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मनमोहन देसाई का शानदार चौका
जैसा कि मैंने बताया कि फिल्म का सबसे मशहूर सीन जिसमें अमिताभ नशे में धुत होकर अपनी ही अक्स से शीशे में बात करते हैं, वह मनमोहन देसाई की बजाय उनकी टीम ने शूट कर लिया था। इस सीन को दोबारा ध्यान से देखेंगे तो इसमें अमिताभ बच्चन के चेहरे की चोट पूरे चेहरे पर घूमती रहती है। तमाम निर्देशकीय खामियों के बाद भी लोगों को फिल्म पसंद आई। अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, ऋषि कपूर, परवीन बाबी, नीतू सिंह, शबाना आजमी, निरूपा रॉय, जीवन, रंजीत और प्राण ने फिल्म के हर किरदार में जान फूंकी। साल 1977 में मनमोहन देसाई की एक साथ चार फिल्में रिलीज हुईं और चारों की चारों ब्लॉकबस्टर। ये चार फिल्में थीं, ‘परवरिश’, ‘धरम वीर’, ‘चाचा भतीजा’ और ‘अमर अकबर एंथनी’। इनमें से ‘अमर अकबर एंथनी’ पहली फिल्म थी जिसमें अमिताभ बच्चन को उन्होंने निर्देशित किया।
अमर अकबर एंथनी का एक दृश्य
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अखबार की कतरन से निकली फिल्म
फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ की कहानी इसके निर्देशक मनमोहन देसाई को उनकी पत्नी जीवनप्रभा ने सुझाई थी एक अखबार में छपी खबर देखकर। खबर ये थी कि एक शराबी अपने तीन बच्चों को पार्क में छोड़कर चला गया। फिल्म ‘वक्त’ में भी ऐसी कहानी लोगों को खूब पसंद आई थी और नासिर हुसैन की फिल्म ‘यादों की बारात’ में धर्मेंद्र, तारिक और विजय अरोड़ा ने भी भाइयों के बिछड़ने की ऐसी ही एक कहानी मे धमाल मचा दिया था। वैसे तो मनमोहन देसाई ही खुद को मसाला फिल्मों का गॉडफादर मुंबइया सिनेमा में मानते रहे लेकिन सलीम जावेद की जोड़ी ये काम नासिर हुसैन की फिल्म ‘यादों की बारात’ में चार साल पहले ही कर चुकी थी। मनमोहन देसाई और अमिताभ बच्चन फिल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ के लिए मिलने से पहले भी मिल चुके थे। तब ये मुलाकात लेखक सलीम खान ने कराई थी। मुलाकात बहुत अच्छी नहीं रही।
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अमर अकबर एंथनी का एक दृश्य
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ऋषि कपूर को पहले पसंद नहीं आई फिल्म
मनमोहन देसाई को अमिताभ बच्चन कुछ ज्यादा प्रभावित नहीं कर सके। मीटिंग खत्म हुई तो मनमोहन ने ताना मारा कि खामखां मेरा वक्त जाया किया। ये लड़का कुछ खास है नहीं। सलीम खान ने तब कहा था कि एक दिन तुम इसी आम से दिखने वाले लड़के को साइन करने जाया करोगे, अपनी खास फिल्में लेकर। ‘ज़ंजीर’ के सुपरहिट होने के बाद जब मनमोहन देसाई ‘अमर अकबर एंथनी’ लेकर अमिताभ के पास गए तो उन्हें भी ये कहानी कुछ खास नहीं लगी थी। ‘लैला मजनू’ की शूटिंग के दौरान मनमोहन देसाई ने ऋषि कपूर को फोन किया तो उन्होंने भी तब उनकी कहानी सुनकर फिल्म के लिए मना कर दिया था। विनोद खन्ना को बिना हीरोइन का अपना रोल कहानी के तब तक बने ड्राफ्ट में ठीक नहीं लगा तो वह फिल्म छोड़ने की धमकी तक देकर शबाना आजमी को इस फिल्म में अपनी हीरोइन बनाकर ले आए।
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