भूपेन हजारिका देश के ऐसे महान कलाकार थे जो अपने गाने खुद लिखते, संगीतबद्ध करते और गाते थे। 5 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि है। उनके गीतों ने लाखों दिलों को छुआ। अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा उन्होंने हिंदी, बंगला समेत कई भारतीय भाषाओं में गाना गाए। उनके गाए गानों के मुरीद अटल बिहारी वाजपेयी भी थे। वाजपेयी ना केवल एक लोकप्रिय नेता और प्रखर वक्ता थे, बल्कि वो फिल्मों के भी काफी शौकीन थे।
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भूपेंद्र
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कविताओं और संगीत के पारखी वाजपेयी खाली वक्त में गाने सुना करते थे। सिंगर और कंपोजर भूपेन हजारिका उनके पसंदीदा सिंगर्स में से एक थे। 90 के दशक में एक बार भूपेन हजारिका दिल्ली आए हुए थे, यहां वो रामलीला मैदान में स्टेज शो कर रहे थे तभी एक शख्स उनके पास आया और वाजपेयी के नाम की एक पर्ची थमा गया। भूपेन हजारिका उस वक्त यह देखकर खुद भी हैरान थे।
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भूपेन हजारिका के सहयोगी कमल कातकी थे, जो उस गिटार बजा रहे थे, पुरानी यादें ताजा करते हुए उन्होंने बताया कि वो प्रोग्राम खत्म होने वाला था तभी एक शख्स पर्ची पकड़ा गया, जिस पर लिखा था कि 'मोई एटी जाजाबोर' (भूपेन हजारिका द्वारा गाया असमी गाना) और पीछे अटलजी का नाम लिखा था। कातकी ने बताया, 'अटलजी के अनुरोध पर भूपेनदा ने वह गाना गाया।
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बाद में जब वो अटल बिहारी वाजपेयी से मिले तो उन्होंने कहा कि वह पहली पंक्ति में बैठे हुए थे और उस गीत का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा था, 'वो गाना सुनने के लिए तड़प रहा था इसलिए ये रिक्वेस्ट किया।' गौरतलब है कि साल 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने भूपेन हजारिका को गुवाहाटी से अपना प्रत्याशी बनाया था। समाज के तमाम गंभीर मुद्दों को हजरिका जी ने फिल्मों और संगीत के माध्यम से पेश किया।
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10 बच्चों में सबसे बड़े, हजारिका को अपनी मां की वजह से संगीत से लगाव हुआ। उन्होंने मात्र 10 साल की उम्र में अपने लिखे गाने को गाया था। साथ ही उन्होंने असमिया सिनेमा की दूसरी फिल्म 'इंद्रमालती' के लिए 1931 में काम किया। उनकी कला ने उन्हें महान गीतकार की फेहरिस्त में लाकर खड़ा किया। 2011 में उनका निधन हो गया।