अभिनेता आयुष्मान खुराना अपनी अगली फिल्म ‘अनेक’ की शूटिंग पूरी करके मुंबई लौट आए हैं। पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से इस फिल्म की शूटिंग करते रहे आयुष्मान ने फिल्म की कुछ दिनों तक शूटिंग दिल्ली में भी की। अब वह मुंबई में हैं। बीच में छूटे संपर्कों को फिर से जोड़ रहे हैं और अपने पहले शौक कविता लेखन को भी फिर से मांजने की तैयारी में जुट रहे हैं।
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : सोशल मीडिया
आयुष्मान खुराना कविताएं खूब लिखते हैं। अपने विज्ञापन भी कई बार वह कविताओं की शक्ल में ही रिकॉर्ड कर देते हैं। उनकी कविताओं में जीवन का विस्तार दिखता है। ये विस्तार प्यार का भी है और जीवन के सवालों का भी। वह खुद से भी सवाल करते हैं और जमाने के उन दस्तूरों से भी जिनके चलते अक्सर आत्माएं भीतर ही भीतर तड़प कर रह जाती हैं। विश्व कविता दिवस पर आयुष्मान बताते हैं कि कविता ने उनकी जिंदगी का रूप बदला है, उन्हें प्रेरणा दी है और उन्हें एक चिंतनशील इंसान बनाया है।
आयुष्मान कहते हैं, "कविता जिंदगी, प्यार, दुख, दर्द और अनुभव की अभिव्यक्ति है और मेरे लिए निजी तौर पर यह मेरे जीवन के हर एक पल, अतीत और वर्तमान की झलक दिखाने वाली मेरी खिड़की है। यह पूरी तरह से कल्पनाशील भी हो सकता है। किसी कवि को अलग-अलग तरह की भावनाओं के बारे में लिखने के लिए बहुत ज्यादा अंधेरे या चरम सुख का अनुभव नहीं करना पड़ता है। उन्हें बस सहानुभूति रखनी होती है।”
आयुष्मान कहते हैं, “मेरे लिए कविता भविष्य की संभावनाओं की दुनिया के अपने सपनों को देखने का एक जरिया भी है। मैंने कविताओं का बेहद चाहा है। और मैं खुद को एक उभरता हुआ कवि मानता हूं। रॉबर्ट ग्रेव्स ने एक बार कहा था कि 'कवि होना एक अवस्था होती है' और मुझे इस पर पूरा विश्वास है। मेरा मानना है कि सभी लोगों को अपनी भावनाओं, यात्राओं, आस्थाओं और अनुभवों को दर्शाना उनके बारे में सोचना और उन्हें याद करना चाहिए।"
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : amar ujala
साथ ही आयुष्मान ये भी चाहते हैं कि हर शख्स को अपने विचारों को पन्ने पर उतारना ही चाहिए। ये प्रक्रिया अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करती है। वह कहते हैं, "मैं यह सोचे बिना कि यह अच्छा होगा या बुरा होगा मैं सभी को लिखने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। कोई हमारी गहरी भावनाओं को अच्छा या बुरा समझ सकता है लेकिन उन भावनाओं को लिखना निश्चित तौर पर उलझन की स्थिति को बहुत हद तक साफ कर देता है।”