निल बट्टे सन्नाटा, बरेली की बर्फी और पंगा जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुकीं अश्विनी अय्यर तिवारी इस समय एनआर नारायण और सुधा मूर्ति की बायोपिक की पटकथा को मूर्त रूप देने में लगी हुई हैं। उनका मानना है कि जब मार्क जुकरबर्ग और बिल गेट्स जैसों पर फिल्में बन रही हैं तो यहां बहुत जरूरी है कि नारायण मूर्ति और सुधा मूर्ति की कहानी भी दुनिया के सामने आनी चाहिए।
लॉकडाउन में घर बैठे उपन्यास लिख रही हैं अश्विनी अय्यर तिवारी, इस बायोपिक पर भी चल रहा है काम
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अश्वनी बताती हैं कि नारायण और सुधा मूर्ति ही वे आखरी इंसान हैं जिनसे वह लॉकडाउन के पहले मिली थीं। वह कहती हैं, 'मैंने उनके साथ बेंगलुरु में पांच दिन बिताए हैं। वह ऐसे इंसान हैं कि उन्होंने मुझे भी एक बेहतर इंसान बना दिया है। मेरी नजर में सुधा एक वास्तविक हीरो हैं। उनकी तस्वीर मेरे मोबाइल फोन के वॉलपेपर पर लगी हुई है। वह जानती हैं कि वह कौन हैं, फिर भी वह अभी भी सीखने की चाह रखती हैं। वह एकदम बच्चे की तरह हैं और उसी की तरह जीना भी पसंद करती हैं।'
इसके अलावा लॉकडाउन का फायदा अश्विनी एक उपन्यास लिख कर भी उठा रही हैं। वह बताती हैं कि यह एक थ्रिलर उपन्यास है। वह हर रोज इसको दो घंटे लिखती हैं। पिछले तीन साल से लिख रहीं इस उपन्यास को उन्होंने जून तक खत्म करने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि इस पर वह कोई फिल्म नहीं बनाने वालीं। वह कहती हैं कि कुछ किताबें सिर्फ किताब रहने के लिए ही लिखी जाती हैं। हर किताब पर फिल्म नहीं बनती।
अश्वनी खाने की बहुत शौकीन हैं लेकिन उन्होंने कभी रसोई घर में काम नहीं किया। लॉकडाउन के समय में वह अपने बच्चों के लिए खाना भी बना रही हैं और घर का काम भी कर रहे हैं। वह बताती हैं, 'खाना बनाना भी एक तरह से एक फिल्म बनाने के बराबर ही है। सभी तत्वों को नाप तोल कर डालना पड़ता है। और उन्हें साथ मिलकर सही मात्रा में मिलाना पड़ता है। तभी अच्छा खाना बनता है। किसी एक चीज से खाना अच्छा नहीं बन सकता। यह काम मुझे बहुत खुशी भी देता है।'
चूंकि अश्विनी ने कभी घर का काम नहीं किया इसलिए उन्हें शुरुआती दिनों में बहुत दिक्कतें आई थीं। वह बताती हैं, 'एक औरत के रूप में हमें हमेशा जिम्मेदारियां लेनी पड़ती हैं। लेकिन, यह घर तो सभी का है। मेरा बेटा पौधों को पानी देता है और दोनों छोटे बच्चे अमारिसा और आराध्या वॉशिंग मशीन चलाने में मेरी मदद करते हैं। हम सभी खाने की अपनी अपनी प्लेटें धोते हैं। बच्चों को घर का काम सिखाना कोई गलत नहीं है और हर किसी को सीखना भी चाहिए।'
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