बॉलीवुड के मशहूर खलनायकों की बात की जाए तो निश्चित रूप से अमरीश पुरी का नाम सबसे पहले आता है। अपने अभिनय से अमरीश पुरी किरदारों को इतना जीवंत बना देते थे कि असल जिदंगी में भी लोग उन्हीं नामों से जानने लग जाते हैं। बॉलीवुड के 'मोगैंबो' यानी अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पाकिस्तान के लाहौर (तब अविभाजित भारत) में हुआ था। 72 साल की उम्र में अमरीश पुरी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। तो चलिए जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें..
फिल्मों में आने से पहले अमरीश पुरी बीमा कंपनी में नौकरी करते थे। अमरीश पुरी ने नौकरी के साथ ही पृथ्वी थियेटर ज्वाइन किया था। वह तो थियेटर में आने के साथ ही नौकरी छोड़ देना चाहते थे लेकिन उनके दोस्तों ने इसके लिए मना किया। बाद में जब उन्हें फिल्मों के लगातार ऑफर आने लगे तो उन्होंने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। उन्होंने करीब 21 साल की सरकारी नौकरी छोड़ दी।
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अमरीश पुरी
- फोटो : सोशल मीडिया
अमरीश पुरी जब 22 साल के थे तो उन्होंने एक ऑडीशन दिया था लेकिन निर्माता ने उनको ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनका चेहरा बड़ा पथरीला है। बाद में उन्होंने 40 साल की उम्र में फिल्म 'रेशमा और शेरा' (1971) में एक ग्रामीण व्यक्ति का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके साथ सुनील दत्त और वहीदा रहमान थे।
80 के दशक में जाकर अमरीश पुरी की पहचान बननी शुरू हुई। बतौर विलेन उन्हें सबने नोटिस किया लेकिन सुभाष घई की ‘विधाता’ (1982) से वो छा गए। फिर अगले साल आई ‘हीरो’ के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। एक वक्त ऐसा भी आया जब अमरीश पुरी के बगैर कोई फिल्म बनती ही नहीं थी।
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अमरीश पुरी
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्मों में उनके अलग-अलग गेटअप किसी को भी डराने के लिए काफी होते थे। 'अजूबा' में वजीर-ए-आला, 'मि. इंडिया' में मोगैंबो, 'नगीना' में भैरोनाथ, 'तहलका' में जनरल डोंग का गेटअप आज भी लोग भुला नहीं पाए हैं। अमरीश पुरी ने करीब 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था। इनमें हिंदी के अलावा, कन्नड़, मराठी, पंजाबी, मलयालम और तमिल भाषा में फिल्में रही हैं। अमरीश पुरी ने हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है।
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