हरिवंश राय बच्चन की पत्नी और अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन का निधन 21 दिसंबर 2007 को हुआ था। तेजी बच्चन एक सोशल एक्टिविस्ट थीं और इंदिरा गांधी के बहुत करीब मानी जाती थीं। इस वजह से अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी का बचपन साथ में बीता। दोनों परिवारों के रिश्तों के बीच काफी उतार-चढ़ाव भी आया। फिर एक समय ऐसा आया जब दोनों परिवार के संबंधों में विश्वास की गाड़ी पटरी से उतर गई। तो चलिए आपको बच्चन और गांधी परिवार के संबंध जुड़ने से टूटने तक की पूरी कहानी बताते हैं।
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पिता हरिवंश राय बच्चन के साथ अमिताभ
- फोटो : सोशल मीडिया
अमिताभ बच्चन के पिता विदेश मंत्रालय में हिंदी अधिकारी के रूप में काम करते थे। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उनके काम और सिद्धांतों की बहुत इज्जत करते थे। इलाहाबाद में रहते हुए दोनों परिवार बहुत करीब आ गए। अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन, नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी की बहुत अच्छी दोस्त बन गईं। बाद में जब बच्चन परिवार दिल्ली शिफ्ट हुआ तब तेजी बच्चन को सोशल एक्टिविस्ट के रूप पहचाना जाने लगा और इंदिरा के साथ उनकी दोस्ती गहरी होती गई।
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amitabh bachchan
- फोटो : social media
यह रिश्ता अमिताभ और राजीव गांधी की दोस्ती के रूप में आगे बढ़ता गया। अमिताभ बच्चन ही थे, जो 13 जनवरी 1968 की सुबह कड़ाके की सर्दी में पालम एयरपोर्ट पर सोनिया गांधी को लेने पहुंचे थे। इस दिन सोनिया, राजीव गांधी की मंगेतर के रूप में भारत आई थीं। सोनिया को बच्चन परिवार के घर ठहराया गया और तेजी बच्चन ने उनको भारतीय संस्कृति और तौर तरीकों के बारे में समझाया।
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ऐसा भी कह सकते हैं कि तेजी बच्चन ने सोनिया के लिए उनकी मां का रोल निभाया था। खबरों के मुताबिक, राजीव गांधी जब सोनिया से शादी करने की तैयारी में थे तब तेजी बच्चन ने ही मध्यस्थ के रूप में भूमिका निभाई थी। इंदिरा गांधी एक इटैलियन लड़की से अपने बेटे की शादी को लेकर अनिच्छुक थीं। इंदिरा गांधी को शादी के लिए तैयार करने वाली तेजी ही थीं। 1969 में जब सोनिया और राजीव गांधी की शादी पक्की हो गई, सोनिया और उनका परिवार कुछ दिनों के लिए विलिंगडन क्रीसेंट स्थित बच्चन परिवार के आवास पर ठहरा।
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अमिताभ बच्चन और राजीव गांधी
- फोटो : social media
1984 में अमिताभ और राजीव गांधी के रिश्ते नई ऊंचाई पर थे। राजीव गांधी ने अपने दोस्त अमिताभ को कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से चुनाव लड़ने के लिए तैयार कर लिया। 1984 में अमिताभ बच्चन को इलाहाबाद से कांग्रेस का टिकट मिला और उन्होंने बड़े अंतर से हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया। दोनों परिवारों के लिए यह गर्व का क्षण था। इसके बाद दिल्ली में अमिताभ बच्चन कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड का हिस्सा बन गए। सतीश शर्मा, अरुण नेहरू, अरुण सिंह और कमलनाथ के साथ उनकी तुलना होने लगी।