महानायक अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं और आएदिन कुछ ना कुछ साझा करते रहते हैं। इसी के चलते बिग बी अपनी या अपने पिता जी हरिवंशराय बच्चन की लिखी कविताएं भी अपने फैंस के साथ शेयर करते हैं। अमिताभ बच्चन ना सिर्फ ट्विटर पर बल्कि इंस्टाग्राम पर भी सब कुछ पोस्ट करते हैं। हाल ही में अमिताभ बच्चन ने कविता सुनाते हुए एक वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आखिर में अपने बाबू जी हरिवंशराय बच्चन को क्रेडिट दिया। लेकिन इसके बाद उन्होंने इस वीडियो को डिलीट करते हुए इस कविता का रचयिता प्रसून जोशी को बताया। इससे पहले भी कई बार अमिताभ बच्चन ने साझा की गई कविता में गलत क्रेडिट दिया था और फिर अपनी गलती स्वीकारते हुए उन्होंने लोगों से माफी मांगी थी। तो वहीं वीडियो में अमिताभ बच्चन ने कविता सुनाने के बाद कोरोना वॉरियर्स के लिए भी कई बातें कही और उनके जज्बे को सलाम किया।
अमिताभ बच्चन ने प्रसून जोशी की कविता के लिए पिता जी को दिया क्रेडिट, गीतकार ने दी प्रतिक्रिया
अमिताभ बच्चन द्वारा साझा किए गए वीडियो में जो कविता वो पढ़ रहे हैं, वो कुछ इस तरह से है, 'रुके न तू। धनुष उठा प्रहार कर। तू सबसे पहला वार कर। अग्नि सी धधक-धधक, हिरण सी सजग-सजग। सिंह सी दहाड़ कर। शंख सी पुकार कर। रुके न तू, थके न तू। झुके न तू, थमे न तू। सदा चले, थके न तू। रुके न तू, झुके न तू।' वीडियो के कैप्शन में लिखा है, 'रुके न तू रचयिता: प्रसून जोशी।'
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कविता खत्म करने के बाद अमिताभ बच्चन कहते हैं, 'ये शब्द याद दिलाते हैं कि हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। वे तब लिखे गए थे, जब देश अलग तरह के संकट और चुनौतियों का सामना कर रहा था। लेकिन वे आज भी गूंजते हैं। मुझे लगता है कि ये शब्द कोविड योद्धाओं हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स के जज्बे को सेलिब्रेट करते हैं।'
बिग बी आगे कहते हैं, 'जो हम सभी के लिए इतना कुछ दांव पर लगा रहे हैं। यह उन्हें सपोर्ट करने और कोविड के खिलाफ लड़ाई को बढ़ावा देने का वक्त है। यह हमारी लड़ाई है। हम जो भी कर सकें, इसमें योगदान दे सकते हैं। भारत के लिए हम सब को एकजुट होना चाहिए।'
इस कविता को अमिताभ बच्चन द्वारा कहे जाने के बाद इस पर कवि व गीतकार प्रसून जोशी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'नतमस्तक हूं, यदि इस कठिन समय में मेरी कविता "रुके न तू” सम्बल बनी, जिसे आदरणीय अमित जी ने सदा की तरह हृदय से पढ़ा है, इंटरनेट में कुछ स्थानों पर इस कविता को श्रद्धेय हरिवंश राय बच्चन की रचना समझा गया है, उनके शिल्प का मुझ में परिलक्षित होना सौभाग्य है। मां सरस्वती को नमन।'
नतमस्तक हूँ यदि इस कठिन समय में मेरी कविता"रुके न तू”सम्बल बनी जिसे आदरणीय अमित जी ने सदा की तरह हृदय से पढ़ा है,इंटरनेट में कुछ स्थानों पर इस कविता को श्रद्धेय हरिवंश राय बच्चन की रचना समझा गया है,उनके शिल्प का मुझ में परिलक्षित होना सौभाग्य है।माँ सरस्वती को नमन।@SrBachchan https://t.co/W31kfBg7xn pic.twitter.com/hr3YA0q3kH