फिल्म 'शोले' में इमाम साहब का किरदार भला कौन भूल सकता है। फिल्म का डायलॉग 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई ?' आज भी पॉपुलर है। इस एक डायलॉग को इतना पॉपुलर बनाने का श्रेय एक्टिंग के महारथी एके हंगल को जाता है। कई बेहतरीन फिल्मों में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले एके हंगल का निधन 98 साल की उम्र में 26 अगस्त 2012 को हुआ। आखिरी दिनों में उन्हें निजी जिंदगी में काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
एके हंगल एक्टर बनने से पहले एक स्वतंत्रता सेनानी थे, लेकिन किस्मत कुछ ऐसी पलटी की वो फिल्मों की दुनिया में आ गए। 52 साल की उम्र में उन्होंने बासु भट्टाचार्य की फिल्म 'तीसरी कसम' (1966) से हिंदी सिनेमा में डेब्यू किया।उन्होंने फिल्मों में कई यादगार किरदार निभाए जिनके लिए हंगल साहब को हमेशा याद किया जाएगा। अपने 40 साल के करियर में एके हंगल ने करीब 225 फिल्मों में काम किया।
भले ही एके हंगल ने हिंदी सिनेमा में अहम योगदान दिया हो लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब इंडस्ट्री में सब ने उनका साथ छोड़ दिया था। शायद ग्लैमर इंडस्ट्री का यही काला सच है। यहां लोग तभी तक आपको सिर-आंखों पर बिठाते हैं जब तक आप सूरज बनकर चमकते हैं लेकिन जैसे ही ये सूरज चमकना बंद होता है तो उसे अर्श से फर्श पर फेंकने में भी देर नहीं लगाते। एके हंगल भी कुछ इसी तरह की पीड़ा का शिकार हुए थे।
पद्मभूषण से सम्मानित एके हंगल को अपने अंतिम दिनों में एक छोटे से कमरे में जिंदगी गुजारनी पड़ी। आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन वो 95 साल की उम्र में अपने बेटे के साथ खंडहर जैसे घर में रह रहे थे। एक वक्त पर हंगल साहब की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उनके पास दवाईयों और मेडिकल बिल भरने तक के पैसे नहीं थे।
एके हंगल के बेटे ने जब इलाज के लिए पैसे ना होने की बात बताई तब अमिताभ बच्चन ने उन्हें इलाज के लिए 20 लाख रुपये दिए थे। साथ ही करण जौहर समेत कई और हस्तियों ने आर्थिक रूप से मदद की। इसके लिए वो खुद को ही जिम्मेदार मानते थे। एके हंगल का मानना था कि उन्होंने पूरी जिंदगी खुद ही कुछ नहीं बचाकर रखा।