आयुष्मान खुराना ने विक्की डोनर, दम लगा के हईशा, बरेली की बर्फी, शुभ मंगल सावधान, आर्टिकल 15, बधाई हो, बाला, अंधा धुन जैसी सभी फिल्मों में पूरे उत्साह के साथ पर्दे पर एक अपूर्ण नायक की हिमायत की है। वे अपूर्ण चरित्रों को सबसे वास्तविक मानते हैं और उनका दृढ़ विश्वास है कि इनसे जुड़ाव महसूस होने के कारण दर्शक ऐसे लोगों से तुरंत कनेक्ट हो जाते हैं। उनका विश्वास गलत नहीं है, क्योंकि बहुमुखी स्टार ने कंटेंट संबंधी अपनी चयनशीलता के साथ एक के बाद एक लगातार 7 हिट्स दिए हैं और अब लोगों ने उन्हें 'आयुष्मान खुराना शैली' वाली फिल्मों के रूप में पुकारना शुरू कर दिया है।
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Ayushmann Khurrana
- फोटो : amar ujala, mumbai
आयुष्मान कहते हैं, 'हमारी खामियां हमें वास्तविक बनाती हैं और हर कोई बिल्कुल वास्तविक, जिससे वे आसानी से संबंधित हो सकें और विश्वसनीय हों, ऐसे लोगों और कहानियों से जुड़ जाता है।' आयुष्मान आगे कहते हैं, 'लोगों को समस्याओं, खुशियों, दर्द, जीत, महत्वाकांक्षाओं, खामियों को देखने में सक्षम होना चाहिए और कहना चाहिए, हां, हम ऐसे ही हैं, हम एक ही चीज महसूस करते हैं और हम ऐसा ही जीवन जीते हैं। वे कहते हैं, यही वह चीज है जो मुझे अपनी फिल्मों को चुनने के लिए प्रेरित करता है।'
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आयुष्मान ने आगे कहा, 'मैं निरंतर अपूर्णता की तलाश में हूं, क्योंकि हमेशा से ही वे हमें सर्वश्रेष्ठ कहानियां देते हैं, जिसे हम बता सकते हैं। एक अपूर्ण व्यक्ति अविश्वसनीय रूप से नायकों वाले कुछ काम कर सकता है और यह दर्शकों को पसंद आएगा। किसी की स्थिति पर विजय प्राप्त करना, अपने आप में एक कहानी है, जिसे लोग देखना पसंद करते हैं।'
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Ayushmann Khurrana
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आखिर में आयुष्मान कहते हैं, 'अगर आप विक्की डोनर से लेकर दम लगा के हईशा, शुभ मंगल सावधान, आर्टिकल 15, अंधाधुन, ड्रीम गर्ल, बाला, आदि फिल्मों को देखें तो पता चलेगा कि मैंने साधारण से हटकर कुछ करने के लिए अपने संघर्षों से गुजर रहे एक अपूर्ण नायक और एक त्रुटिपूर्ण इंसान की भूमिका निभाई है। ये ऐसे किरदार हैं जो मुझे अपील करते हैं क्योंकि ये किरदार वास्तविक हैं और सौभाग्य से दर्शकों ने भी पर्दे पर इन्हें पसंद किया है।'