इसे संयोग कहा जाए या कुछ और इस बार के राष्ट्रीय पुरस्कारों में देशभक्ति दिखाने वाले फिल्मों को तवज्जो मिली है। बेटी पढ़ाने बचाने से लेकर देश के दुश्मनों को मारने वाली हीरोइन इसका प्रमाण है। और तो और हिमालय पर धूनी रमाने वाला शिवाय भी जूरी को स्पेशल (स्पेशल इफेक्ट) लगा है।
अवॉर्ड के पांच बड़े नाम इसी और इशारा करते हैं। इसकी बानगी आपको अगली स्लाइड में देखने को मिलेगी।
रुस्तम - फिल्म 'रुस्तम' के लिए अक्षय कुमार को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिया गया है। फिल्म का कथानक साफ है कि बीवी को बहाना बनाकर दरअसल हीरो देश के दुश्मन को खत्म करना चाहता है। दूसरा पहलू यहां पत्नी की पवित्रता और सम्मान बचाए रखने का भी है।
नीरजा - 'नीरजा' को बेस्ट फिल्म का पुरस्कार दिया गया है। कथानक में एक देशभक्त एयरहोस्टेस दुश्मन देश में अपने देशवासियों को बचाते हुए शहीद हो जाती है। दुश्मन देश जाहिर तौर पर पाकिस्तान है। इस फिल्म ने भी देशभक्तों के दिल में देशभक्ति की हिलोरें पैदा कर दी थी।
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दंगल
- फोटो : स्कूप व्हूप
दंगल - 'मेरी बेटियां बेटों से कम हैं क्या'। 'दंगल' फिल्म में अधेड़ हो चुके बाप के मन देश के लिए पदक न जीत पाने की कसक है।
फिर वो बेटियों के जरिए अपनी दबी इच्छा पूरी करता है। देश को भी सम्मान मिलता है और बेटियां भी बेटों से इक्कीस साबित होती है। लगे हाथ आमिर खान ने मोदी जी के बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ की भी वकालत कर डाली है।
शिवाय - अजय देवगन की शिवाय को हालांकि बेस्ट स्पेशल इफेक्ट वाली फिल्म का अवॉर्ड मिला है। देखा जाए तो हिमालय पर बैठकर धूनी रमाता शिवाय, धर्म के साथ साथ अपने देश और अपनी बेटी को लेकर उतना ही पजेसिव है जितना हिमालय को लेकर। पराए देश में गोरों के बीच एक्शन दिखाकर अपने देश की इज्जत को वापस लाना किसी देशभक्ति से कम है क्या।